अंधविश्वास या फिर विश्वासः कड़ाके की ठंड में भी जूता-चप्पल नहीं पहनते इस गांव के लोग

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नई दिल्ली। भारत में इन दिनों ठंड अपने पूरे सुरूर पर है। ऐसे में कोई बिना जूते व चप्पल के रहने की बात करे तो सुनकर थोड़ा अजीब भी लगेगा। लेकिन यह भी सच है कि पूरी दुनिया अजीब-गरीब किस्सों से भरी पड़ी है। ठंड क्या कोई भी मौसम हो बिना जूता व चप्पल पहने चलने की कल्पना करना भी डरावने सपने जैसा है। बिना जूता-चप्पल के कोई इधर-उधर घूम सकता है, यह सुनकर आप उस पर जल्दी यकीन नहीं करेंगे। लेकिन भारत में एक गांव ऐसा है जहा लोग आज भी बिना जूता-चप्पल पहने रहते हैं। यहां के लोग गलती से भी जूता-चप्पल पहनने की गलती नहीं करते। अगर कोई इनसे जूता-चप्पल पहनने की बात करता है तो ये नाराज हो जाते हैं। तमिलनाडु के मदुराई से करीब 20 किमी दूर ऐसा गांव है जहां पर लोगों को जूते-चप्पल पहनकर आना सख्त मना है। इस अनोखे गांव का नाम कलिमायन है, इस गांव के लोग वर्षों से जूते या चप्पल नहीं पहने हैं।

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इतना ही नहीं इस गांव के लोग अपने बच्चों को भी जूते-चप्पल पहनने से दूर रखते हैं। अगर कोई जूता-चप्पन पहनने की गलती कर बैठता है तो उसे कठोर सजा भी सुनाई जाती है। जूता-चप्पल न पहनने की इस अनोखी परंपरा के पीछे यहां के लोगों का अपना तर्क है। इस गांव के लोग अपाच्छी नाम के देवता को वर्षों से पूजते आ रहे हैं। गांव वालों की आस्था है कि अपाच्छी देवता ही उनके रक्षक हैं। अपने इस देवता के प्रति अपार श्रद्धा के चलते लोग गांव की सीमा में जूता-चप्पल पहनने से परहेज करते हैं।

इस अजब-गजब परंपरा को इस गांव के लोग सदियों से निभाते चले आ रहे हैं। बताया जाता है कि जब कभी यहां के लोगों को गांव से बाहर जाना होता है तो लोग चप्पल हाथ में लेकर गांव की सीमा पार करने पर उसे पहनते हैं, और वापस होते वक्त गांव की सीमा में प्रवेश करने से पहले ये लोग चप्पल निकाल कर अपने हाथ में ले लेते हैं। दुनिया में आस्था और विश्वास के चलते भारत की अलग छाप है। बहुभाषी, बहुसंस्कृति, अनेकता में एकता यही भारत को औरों से अलग बनाता है। यहां धर्म में कई उप धर्म हैं और सभी की अपनी मान्यताएं है। फिलहाल हाड़ कंपा देने वाली ठंड में बिना जूता-चप्पल के रहने की बात सोचकर आश्चर्य तो होगा ही। लेकिन जहां आस्था है, वहीं विश्वास है और जहां विश्वास है, वहीं आस्था है।

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