गरमा गया ओवैसी का पारा, जब मोहन भागवत ने हिंदुओं की राष्ट्रभक्ति को लेकर कह दी ये बात

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एक लोकतांत्रिक देश में अभिव्यक्ति का अधिकार सबको है। वे अपनी बात रख सकते हैं। लेकिन उतना ही अधिकार किसी की बात का मुखालफत करने का भी है। अब इसी बीच संघ प्रमुख मोहन भागवत ने एक कार्यक्रम में पुस्तक विमोचन के दौरान हिंदुओं की राष्ट्रभक्ति पर  कुछ ऐसी टिप्पणी कर दी, जिससे खफा हुए ओवैसी साहब का पारा गरमा गया और उन्होंने भागवत के  खिलाफ मोर्चा खोल दिया। दरअसल, मोहन भागवत ने एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में कहा कि इस देश का हिंदू  कभी-भी राष्ट्र विरोधी नहीं हो सकता है।  यदि कोई हिंदू है तो वो बेशक राष्ट्र भक्त है। यही हिंदुओं की प्रकृति भी है।  ये भी पढ़े :हिंदू कभी भारत विरोधी नहीं हो सकता, देशभक्ति ही उसका मूल चरित्र : मोहन भागवत

ओवैसी ने कहा कि चाहे कैसी भी परिस्थितियां आ जाए लेकिन हिंदू कभी राष्ट् विरेोधी नहीं हो सकता है। राष्ट्र प्रेम उसके धर्म का मूल है। बस..भागवत की इन्हीं विभानजनकारी  बातों पर आपत्ति जताते हुए ओवेसी ने  अतीती इबारतों की घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि, क्या भागवत जवाब देंगे: वे बापू के हत्यारे गोडसे के बारे में क्या बोलेंगे? नेली कत्लेआम (असम) के लिए जिम्मेदार आदमी के बारे में क्या कहेंगे? साल 1984 के सिख विरोधी दंगों और 2002 के गुजरात दंगों के बारे में क्या बोलेंगे?”

ओवैसी ने अपने ट्वीट में कहा कि ‘ये मानना तर्कसंगत है कि अधिकांश भारतीय देशभक्त हैं भले ही उनका धर्म कुछ भी हो. लेकिन ये केवल आरएसएस की जाहिल विचारधारा में ही है कि केवल एक धर्म के अनुयायियों को देशभक्ति के प्रमाण पत्र जारी किए जाते हैं। वहीं कई लोगों का अपना पूरा जीवन ही अपनी राष्ट्र भक्ति साबित करने में लग जाता है। बहरहाल,   मोहन भागवत की  इस टिप्पणी पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाओं का सिलसिला जारी है। लेकिन अभी तक उन्होंने ओवैसी के इस ट्वीट का कोई जवाब नहीं दिया है। खैर,   अब तो यह आने वाला वक्त ही बताएगा कि ओवैसी  की इन प्रतिक्रियाओं पर भागवत का क्या जवाब रहता है। हालांकि,  यह कोई पहला मौका नहीं है कि जब उन्होंने इस तरह का बयान दिया है बल्कि इससे पहले भी कई मौकों पर वे इस तरह का बयान दे चुके हैं। ये भी पढ़े :अतीक के लाल बंगले पर टिकी पुलिस की नजर, इसी के लिए प्रॉपर्टी डीलर की देवरिया जेल में हुई थी पिटाई