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Friday, September 17, 2021

कोरोना से हुई मौत पर मुआवजा नीति न बनाने पर SC ने केंद्र सरकार को लगाई फटकार, की सख्त टिप्पणी

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को फटकार लगाई है। कोरोना संक्रमण से मरने वालों के परिजनों को मुआवजा देने और डेथ सर्टिफिकेट में मौत की सही वजह दर्ज करने की व्यवस्था को लेकर अब तक कोई जवाब केंद्र द्वारा दाखिल करने पर कोर्ट ने नाराजगी जताई है। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा है कि ‘आप जब तक कदम उठाएंगे, तब तक कोरोना की तीसरी लहर भी आकर जा चुकी होगी।’

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कोर्ट का पुराना आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने 30 जून को दिए अपने आदेश में कहा था कि कोरोना से हुई हर मौत पर सरकार मुआवजा देना चाहिए। नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी से कोर्ट ने कहा था कि ‘वो आगामी 6 हफ्ते में मुआवजे की राशि तय कर राज्यों को सूचित करे।’ कोर्ट ने माना था कि सरकार का वैधानिक कर्तव्य आपदा में लोगों को मुआवजा देना लेकिन वो रकम कितनी होगी इसका फैसला भी सरकार पर कोर्ट ने छोड़ दिया था।

याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट में दलील दी थी कि मृतकों को अस्पताल से सीधे अंतिम संस्कार के लिए ले जाया जा रहा है। उनका न तो पोस्टमॉर्टम हो रहा है और न ही डेथ सर्टिफिकेट में लिखा जाता है कि मृत्यु कोरोना की वजह से हुई है। अगर भविष्य में मुआवजा सरकार की तरफ से दिया जाता है तो उसका लाभ पीड़ित परिवारों को नहीं मिल पाएगा। कोर्ट ने इस पर कहा था कि मृत्यु प्रमाण पत्र मौत की वजह साफ-साफ लिखी जानी चाहिए।

वहीं प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया को भी सरल करने को कहा था। वहीं मृतक का मृत्यु प्रमाण पत्र बन भी चुका है तो परिवार की शिकायत पर उसका निराकरण किया जाए। जस्टिस एम आर शाह और अनिरुद्ध बोस की बेंच को सुनवाई के दौरान एडिशनल सॉलिसीटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने न्यायालय को सूचित किया कि अब तक सरकार की और से हलफनामा दाखिल नहीं हुआ है, जिसके लिए उन्होंने 10 दिन का समय और मांगा है।

सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में कहा कि मामला अभी सरकार के पास विचाराधीन है। वहीं अब 11 सितंबर तक जवाब दाखिल करने के लिए कोर्ट ने कहा है।

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