प्राइवेट होंगी 151 ट्रेनें, किराया बढ़ाने पर सरकार नहीं कर सकेगी कोई हस्तक्षेप

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नई दिल्ली। कोरोना संकट के बीच भारतीय रेलवे ने ये किया है कि ऑपरेटर्स निजी ट्रेनों का किराया अपनी मर्जी के मुताबिक निर्धारित कर सकते हैं, इसमें सरकार का किसी तरह का दखल नहीं होगा। भारतीय रेलवे ने आगे कहा है कि निजी ऑपरेटर्स के लिए यात्री ट्रेनों का किराया अभी तय नहीं किया गया है और न ही अभी इसकी कोई सीमा निर्धारित की गई है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया है कि अगर निजी संचालक किराया बढ़ाते भी है तो इसमें सरकार का कोई हस्तक्षेप या सरकार से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी। मतलब निजी ट्रेनों को संचालित करवाने वाले ऑपरेटर्स जो भी ट्रेन चलाएंगे, वह उसका किराया अपनी मर्जी व बाजार के हिसाब से निर्धारित करेंगे। गौरतलब है कि रेलवे 109 रूट्स पर 151 ट्रेनों को संचालित करने का जिम्मा 35 वर्ष के लिए निजी ऑपरेटर्स को सौंपने की योजना कर चुका है।

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सूत्रों की मानें तो इस प्रावधान को कोर्ट में कोई चुनौती न दे पाए इसलिए रेलवे का यह पूरा प्रयास है कि सरकार जल्द ही कैबिनेट से इसे मंजूरी दिला ले। रेलवे एक्ट के मुताबिक सिर्फ केन्द्र सरकार या विभिन्न मंत्रालय मिलकर रेलवे के किराए का निर्धारण कर सकते हैं। फिलहाल ट्रेनों को निजी हाथों में सौंपने से पहले कई सवाल हैं जिनके जवाब सरकार को स्पष्ट करने होंगे। इन सवालों में ट्रेनों का 160 किमी की रफ्तार से चलना, दुर्घटनाओं के बाद की स्थिति और उनकी मेंटेनेंस को लेकर अभी कई संशय हैं जिसकी स्थिति स्पष्ट करनी पड़ेगी।

रेलवे के किराया निर्धारण को लेकर सरकार की और से एक अधिकारी ने बताया कि अब यह निजी हाथों में होगा और अब वही इसका किराया तय करेंगे। इसी के साथ निजी संचालक ऑनलाइन टिकट बेच सकेंगे और सरकार किराये बढ़ाने को लेकर किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं करेगी। ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि लागत को देखते हुए किराया बढ़ाया जाएगा। फिलहाल अब सरकारी नियंत्रण में ट्रेने नहीं रहेंगी और सेवाएं सुधार के साथ यात्रा करना मंहगा हो जाएगा। कुल मिलाकर रेल से सफर करने वाले अपनी जेब ढीली करने के लिए तैयार रहें।

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