Wednesday, December 7, 2022

Pregnancy Termination: अविवाहित महिलाओं के लिए SC ने लिया फैसला, मिल गया एबॉर्शन का अधिकार

विवाहित ही नहीं, अविवाहित महिलाये भी 24 हफ्ते तक गर्भपात करा पाएंगी. यानी अब लिव-इन रिलेशनशिप और सहमति से बने संबंधों से गर्भवती होने वाली महिलाएं भी अबॉर्शन (abortion) करा पाएंगी.

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Supreme Court on Pregnancy Termination: अपने एक ऐतिहासिक फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि सारे महिलाओं को सुरक्षित, कानून सम्मत तरीके से गर्भपात का हक है. केवल विवाहित ही नहीं, अविवाहित महिलाये भी 24 हफ्ते तक गर्भपात करा पाएंगी. यानी अब लिव-इन रिलेशनशिप और सहमति से बने संबंधों से गर्भवती होने वाली महिलाएं भी एबॉर्शन (abortion) करा पाएंगी.

Pregnancy Act 3-B की कुछ ऐसी है व्याख्या

मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी एक्ट 3-B की व्याख्या आज सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने की है. इस बात को कोर्ट ने साफ किया है कि संसोधन के बाद ये क़ानून सिर्फ विवाहित महिलाओं तक सीमित नहीं है. इससे पूर्व सामान्य मामलों में 20 हफ्ते से अधिक और 24 हफ्ते से कम के गर्भ के एबॉर्शन का हक अब तक विवाहित महिलाओं को ही था.

SC में पहुंचा इस तरह मामला

ये मामला 25 साल की महिला की याचिका के जरिये सुप्रीम कोर्ट में आया. इस महिला ने 23 सप्ताह के गर्भ को गिराने की कोर्ट से परमिशन मांगी थी. महिला ने कहा था कि वो आपसी सहमति से गर्भवती हो गई है पर वो बच्चे को जन्म नहीं देना चाहती क्योंकि उसके पार्टनर ने शादी से मना कर दिया है. पर इस साल 16 जुलाई को दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने याचिका ये कहते हुए खारिज कर दी थी कि याचिकाकर्ता अनमैरिड है और वो सहमति से गर्भवती हुई है. ये मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी रूल्स, 2003 के अंतर्गत किसी भी प्रावधान में नहीं आता है. जिसके बाद लड़की ने राहत के लिए एससी (Supreme Court) का रुख किया था. 21 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने दिए अंतरिम आदेश में महिला को राहत देते हुए गर्भपात की परमिशन दे दी , पर इस कानून की व्याख्या से जुड़े पहलुओं पर सुनवाई जारी रखी. इस पर सुप्रीम कोर्ट का आज बड़ा और ऐतिहासिक निर्णय आया है.

मैरिटल रेप पीड़ित भी करा सकेगी अबॉर्शन

सुप्रीम कोर्ट को इस फैसले में ने एक अहम व्यवस्था भी दी गई है. कोर्ट ने इस बात को पूरी तरह से साफ किया है कि यदि बिना मर्जी के बने संबंधों की वजह से कोई विवाहित महिला गर्भवती हो जाती है, तो इसे भी मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट (Termination of Pregnancy Act) के अंतर्गत रेप माना जाएगा. मतलब कि इस लिहाज से उसे भी अबॉर्शन कराने का अधिकार होगा.

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