बेहद कमाल की है PM मोदी की ये कविता..पढ़कर मज़ा आ गया..आप भी पढ़िए 

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साल 2020 की शुरूआत ही दंगे से हुई.. फिर दंगों के बाद हुई कोरोना की एंट्री..कोरोना की हुई इस खौफनाक एंट्री ने पूरे देश की गलियों को लंबे अर्सों तक के लिए वीरान कर दिया और वीरान गलियों के सबब से अर्थव्यवस्था का पहिया भी रूका.. जिसके नतीजतन आर्थिक चुनौतियां अपने शबाब पर पहुंच गई जिससे अब राहत पाने के लिए सरकार अपनी कोशिशों का पिटारा खोल चुकी है। इसके सकारात्मक नतीजे भी सामने आ रहे हैं। खैर , अब चुनौतियों  और कठिनाइयों से तरबतर यह साल अब हमें अलविदा कह चुका है। ऐसे आलम में सभी नए वर्ष को खास बनाने की तैयारियों में जुट चुके हैं। जहां सरकार रोजगार के साधन पैदा करने की कोशिश में  हैं, तो वहीं  आम जनता भी राहत भरी सांस लेने की  जुगत में मसरूफ नजर आ रही है। ये भी पढ़े :वर्ष के आखिरी में भी पीएम मोदी ने वोकल फॉर लोकल से लेकर आत्मनिर्भर भारत पर दिया जोर

बहरहाल,  मौजूदा समय में अब इस कश्मकश के बीच पीएम मोदी ने नव वर्ष के मौके पर अपनी एक मनोहर कविता साझा की है। यह कविता अभी सोशल मीडिया पर काफी तेजी से वायरल हो रही है।  लोग  इस पर जमकर अपना रिएक्शन देते हुए नजर आ रहे हैं। बता दें कि पीएम मोदी अपनी इस शानदार कविता में भुली बिसरी पुरानी यादों को भुलाते हुए नए कल की शुरूआत करने की  दिशा में दृढसंकल्पित दिख रहे हैं।

आसमान में सिर उठाकर
घने बादलों को चीरकर
रोशनी का संकल्प लें

भी तो सूरज उगा है

दृढ़ निश्चय के साथ चलकर
हर मुश्किल को पार कर
घोर अंधेरे को मिटाने
अभी तो सूरज उगा है

विश्वास की लौ जलाकर
विकास का दीपक लेकर
सपनों को साकार करने
अभी तो सूरज उगा है

न अपना न पराया
न मेरा न तेरा
सबका तेज बनकर
अभी तो सूरज उगा है

आग को समेटते
प्रकाश का बिखेरता
चलता और चलाता
अभी तो सूरज उगा है

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