लॉकडाउन और पलायन, मंजिल तक पहुंचने से पहले छूट गया जीवनसाथी का साथ

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सिकंदराराऊ। इंसान कितना भी प्रयत्न कर ले पर हर घटना कुछ न कुछ अपना निशान छोड़ ही जाती है, जख्म दे जाती है, यादें रह जाती हैं। आज पूरी दुनिया कोरोना वायरस जैसी महामारी की चपेट में है। सबके सामने अपने वजूद को बचाने की चुनौती है। ऐसे में भारत में भी इस महामारी से बचने के लिए 21 दिनों का लॉकडाउन चल रहा है। कहने को 21 दिन कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन इन दिनों कुछ लोगों को जो जख्म मिल रहे हैं उसकी भरपाई पूरी जिंदगी नहीं हो पाएगी। यूं तो सरकार ने किसी को कोई समस्या न होने पाए इसके पूरे प्रबंध में लगी हुई है। लेकिन सबकी कुछ न कुछ समस्याएं होती हैं जिससे व्यक्ति को खुद ही निपटना पड़ता है। लोगों पर आए मुसीबत का यह दौर भी खत्म होगा, लेकिन इससे पहले कई परिवार खत्म हो जाएंगे। लॉकडाउन के चलते मोपेड पर पत्नी व दो बच्चों के साथ दिल्ली से सिद्धार्थनगर के लिए निकले युवक की अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद मौत हो गई।

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विनोद तिवारी (32 वर्ष) दिल्ली की नवीन विहार कॉलोनी में अपनी पत्नी व दो बच्चों के साथ किराए के मकान में रहता था। जहां वह बिस्कुट—कुरकुरे आदि सामानों की सेल्समैनी करके अपने परिवार का भरण पोषण कर रहा था। वह तीन वर्षों से मुंह से कैंसर से पीड़ित था, जिसका उपचार भी चल रहा था। लॉकडाउन के चलते काम बंद होने से आय का स्रोत बंद हुआ तो विनोद शुक्रवार की देर रात्रि पत्नी व दो बच्चों को मोपेड पर बिठाकर घर के लिए रवाना हो लिए। सुबह 10 बजे के करीब वह सिकंदराराऊ (अलीगढ़) जीटी रोड पर नगर पालिका के निकट पहुंचे थे तभी उनकी तबीयत बिगड़ गई। मोपेड रोकते ही वह जमीन पर गिर पड़े। उनके साथ दूसरी मोपेड से चल रहे भाई ने उपचार के लिए एंबुलेंस को फोन किया। लेकिन एंबुलेंस समय से नहीं मिल पाई। आरोप है कि एंबुलेंस की मदद करीब एक घंटे तक नहीं मिली और इसी बीच विनोद ने दम तोड़ दिया।

सूचना पर पहुंचे कोतवाली प्रभारी प्रवेश राणा ने शव को एक निजी वाहन से सीएचसी भिजवाया। इसके बाद भी विनोद के शव को सिद्धार्थनगर तक पहुंचाने में प्रशासन से मदद नहीं मिली। धनाभाव के चलते शव चार घंटे तक सीएचसी पर रखा रहा। मामले की जानकारी होने पर कस्बा के समाज सेवी जयप्रकाश गुप्ता एडवोकेट आगे आए और 15 हजार रुपए एकत्रित करके एक मेटाडोर में शव को रखवाया तथा पत्नी व भाइयों को बिठाकर सिद्धार्थनगर के लिए रवाना किया। व्यक्ति लाख प्रयास कर ले लेकिन सब कुछ उसके हाथ नहीं है यह हर किसी को पता है। कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए लॉकडाउन सबसे वेहतर विकल्प माना जा रहा है। लेकिन लोगों की भावनाएं, संवेदनाएं और परिस्थिति पूरी व्यवस्था पर भारी पड़ रही है। खतरा आने से पहले लोग खतरा मोल ले रहे हैं।

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