किसान आंदोलन का हरियाणा की सियासत पर दिखा असर, BJP-JJP गठबंधन को लगा झटका, गिर सकती है खट्टर सरकार

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चंडीगढ़। दिल्ली सीमा पर पिछले तीस से ज्यादा दिनों किसान आंदोलन चल रहा है। जिसका प्रभाव अब हरियाणा की राजनीति में दिखने लगा है। आंदोलन के दौरान ही राज्य में हुए स्थानीय निकाय चुनाव में कांग्रेस को तो ज्यादा फ़ायदा नहीं हुआ है लेकिन सत्तारूढ़ बीजेपी-जेजेपी गठबंधन को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है। इन चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली। जहां पंचकूला की मेयर सीट बीजेपी के खाते में गई, वहीं सोनीपत सीट पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की। कांग्रेस-बीजेपी को अंबाला सीट पर बड़ा झटका लगा जब ये सीट हरियाणा जन चेतना पार्टी के खाते में चली गई।

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राज्य में हुए इन निकाय चुनाव में उलटफेर की बड़ी वजह किसान आंदोलन माना जा रहा है। राज्य में हुए चुनावी नतीजे बता रहे हैं कि, बीजेपी के साथ सरकार में शामिल दुष्यंत चौटाला को एक बार भविष्य के बारे में सोचकर बड़ा फैसला ले सकते हैं। उनकी पार्टी किसानों के मुद्दों को ही आगे रखकर राजनीति करती है। ऐसे में अब दुष्यंत अपने मूल वोट बैंक को ज्यादा नाराज करने के बारे में ज्यादा सोच नहीं सकते हैं। पंचकूला नगर निगम की सीट पर बीजेपी और जेजेपी गठबंधन ने अपना उम्मीदवार कुलभूषण गोयल को उतारा था। कांग्रेस ने उपेंद्र कौर अहलूवालिया को अपना प्रत्याशी बनाकर उतारा था।

दोनों ही प्रत्याशियों के बीच जबरदस्त टक्कर देखने को मिली थी। बीजेपी और जेजेपी गठबंधन के उम्मीदवार जहां 49,860 वोट मिले। वहीं कांग्रेस उम्मीदवार को 47,803 वोट मिले। बीजेपी इस सीट पर जीत सिर्फ 2057 वोट दर्ज कर पाई, जिसे फ़िलहाल ज्यादा बड़ी जीत नहीं कहा जा रहा है। सोनीपत सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी निखिल को 72,118 वोट मिले थे, जबकि बीजेपी प्रत्याशी 58,300 वोट मिले। इस सीट पर कांग्रेस ने 13,818 वोटों से जीत दर्ज की। अंबाला में बीजेपी प्रत्याशी वंदना शर्मा की करीब 8000 मतों हार हुई। उन्हें हरियाणा जन चेतना पार्टी की प्रत्याशी रानी शर्मा ने मात दी।

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