सिस्टर अभया के कातिल पादरी और नन को मिली उम्रकैद की सजा, लगा 5-5 लाख का जुर्माना

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नई दिल्ली। केरल के चर्चित सिस्टर अभया मर्डर केस में सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने दोषी कैथोलिक पादरी और एक नन को उम्र कैद की सजा सुनाई है। न्यायाधीश के सनल कुमार ने फादर थॉमस कोट्टूर और सिस्टर सेफी पर पांच-पांच लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है। 27 मार्च 1992 में अभया (21) की संदिग्ध हालात में सेंट पायस कॉन्वेंट के एक कुएं से मिला था। पादरी और नन को सबूतों के साथ छेड़छाड़ के साथ मामले में भी दोषी पाया गया है। उन्हें इसके उन्हें सात-सात वर्ष की सजा सुनाई गई है। कोर्ट ने कहा कि, हत्या के मामले में पदारी और नन पर लगे आरोप सही साबित हुए हैं। भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं में 302 (हत्या) और 201 सबूतों के साथ छेड़छाड़ करना/ मिटाने का प्रयास) के तहत दोषी पाया है। फिलहाल दोषी जमानत पर थें, जिन्हे कोरोना की जांच बाद हिरासत में ले लिया गया है।

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फादर कोट्टूर को केंद्रीय जेल पूजापुरा भेजा गया है, वहीं सिस्टर सेफी को अत्ताकुलनगारा महिला जेल भेजा गया है। सिस्टर अभया बीसीएम द्वितीय वर्ष की पढ़ाई कोट्टयम के कॉलेज से कर रही थीं। कोर्ट ने इस मामले में एक अन्य आरोपी फादर जोस पुथ्रीक्कयील को सबूतों की कमी की वजह से बरी कर दिया था। मामले की जांच में स्थानीय पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीम ने अभया की मौत की वजह सुसाइड बताई थी। 29 मार्च 1993 में मामले की जांच सीबीआई ने शुरू की, जिसने अपनी क्लोजर रिपोर्ट में कहा कि, ये हत्या का मामला है। लेकिन हत्या किसने की है, इसके बारे में कोई जानकारी अब तक सामने नहीं आ सकी है।

इसके बाद मामले को लेकर 4 सितंबर 2008 में केरल उच्च न्यायालय ने सीबीआई को फटकार लगाई थी। कोर्ट के फटकार के बाद सीबीआई ने फादर पूथ्रीक्कयील, फादर कोट्टूर, नन सेफी को हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया था। जांच के अनुसार, सेफी के कथित रूप से कोट्टूर और पूथ्रीक्कयील कथित रूप से अवैध संबंध थे। सीबीआई की जांच रिपोर्ट के अनुसार, 27 को अभया ने कोट्टूर और सेफी आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया, जिसके बाद सिस्टर अभया की हत्या कर उनका शव फेंक दिया गया था।

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