दो सालों में सुरक्षाबलों ने ढेर किए 460 नक्सली, 161 जवान हुए शहीद

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नई दिल्ली। भारतीय सुरक्षाबलों ने बीते दो वर्षों में 460 नक्सली उग्रवादियों को मौत की नींद सुलाया है। इस दौरान नक्सली हमलों में सुरक्षाबलों के 161 जवान अपना फर्ज निभाते हुए शहीद हुए हैं। ये जानकारी सूचना के अधिकार के तहत पूछे गए सवाल के जवाब में केंद्रीय गृह मंत्रालय की वामपंथी उग्रवाद (LWE) डिवीजन ने दी है। गृह मंत्रालय से सूचना के अधिकार के तहत नोएडा के वकील और आरटीआई कार्यकर्ता रंजन तोमर ने जानकारी मांगी थी कि, 2018 से लेकर 2020 के दौरान सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में कितने वामपंथी उग्रवादियों ढेर किया है। इस दौरान अपनी ड्यूटी निभाते हुए कितने जवान शहीद हुए हैं।

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सूचना के अधिकार के तहत पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए मंत्रालय आंकड़ों के साथ पूरी जानकारी दी है। बीते वर्ष सितंबर में केंद्रीय गृह मंत्रालय की तरफ से कहा गया था कि, देश में नक्सलवाद या वामपंथी उग्रवाद से सम्बंधित हिंसा के मामलों में गिरावट हुई है। उसका प्रभाव लगातार सिमट रहा है और अब 46 जिलों तक ही सीमित रह गया है। 16 सितंबर को दी गई जानकारी ने गृह मंत्रालय ने बताया था कि, वामपंथी उग्रवाद से जुड़ी हिंसा के दौरान वर्ष 2010 में सुरक्षाबलों और आम नागरिकों की मौत का आंकड़ा 1005 था, जबकि अगले 9 वर्षों में ये आंकड़ा घटकर सिर्फ 202 रह गया।

15 अगस्त 2020 तक 102 जवान और आम नागरिक नक्सली हिंसा का शिकार हुए थे। वहीं वर्ष 2019 में 15 अगस्त तक 137 जवान और नागरिकों की मौत हुई थी। वर्ष 2017 में 263 और वर्ष 2018 में 240 जवानों और आम नागरिकों की मौत नक्सली हिंसा में हुई थी। गृह मंत्रालय की वेबसाइट की अनुसार, वर्ष 2004 से 2019 के दौरान देश में 8,197 लोग वामपंथी उग्रवाद का शिकार बने हैं। इनमे से ज्यादातर लोग आम नागरिक थे, जिसमे ज्यादातर आदिवासी थे। जिन्हे पुलिस का मुखबिर बताते हुए नक्सली संगठनों ने बड़ी बेहरहमी से उन्हें टार्चर करते हुए मौत के घाट उतार दिया था।

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