Friday, October 22, 2021

आतंकियों के निशाने पर हिंदू और अल्पसंख्यक, कश्मीरी पंडित घाटी छोड़ने को दोबारा हुए मजबूर

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जम्मू। कश्मीर में पिछले दो सप्ताह से हिंसा की घटनाएं बढ़ी हैं। आतंकियों के निशाने पर दोबारा अल्पसंख्यकों और हिंदु हैं। इसकी वजह से घाटी से कश्मीरी पंडितों का विस्थापन दोबारा शुरू हुआ है। बताया जा रहा है कि घाटी में खराब होते माहौल को देखते हुए अब तक सैकड़ों परिवार जम्मू जा चुके हैं। कश्मीर में रह रहे कश्मीरी पंडितों से उनके परिवार जल्द से जल्द घाटी छोड़ने के लिए बोल रहे हैं। घाटी में बदलते माहौल का सबसे ज्यादा असर कश्मीरी पंडितों पर पड़ रहा है।

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कश्मीरी पंडितों को कश्मीर में बसाना में चाहती है केंद्र सरकार
केंद्र सरकार की कोशिश है कि जल्द से जल्द से दोबारा कश्मीरी पंडितों को कश्मीर में बसाया जाये। वहीं घाटी में बढ़ती हुई आतंकी घटनाएं कश्मीरी पंडितों की घर वापसी पर हिम्मत को तोड़ रही हैं। घाटी में बढती आतंकी घटनाओं को देखते जम्मू की सबसे बड़ी कश्मीरी पंडित विस्थापित कॉलोनी जगती में शनिवार सुबह कई परिवार कश्मीर से भागकर पहुंचे हैं। इन परिवारों का साफ़ कहना है कि जान जाने के डर की वजह से वो सभी कश्मीर को छोड़कर आए हैं। उनका कहना है कि घाटी का माहौल फिलहाल ठीक नहीं है।

लोगों में डर इतना ज्यादा है कि वो ओन कैमरा कुछ भी बोलने के लिए तैयार नहीं हैं। घाटी से सुरक्षित जम्मू की जगती विस्थापित कॉलोनी पर लोगों ने राहत की सास ली। कॉलोनी में करीब 45 परिवार मौजूदा समय में रहते हैं। इन लोगों में ज्यादातर परिवार कश्मीरी हैं। या पीएम पैकेज के तहत नौकरी कर रहे हैं। या काम से कश्मीर जाते रहते हैं।

जगती कॉलोनी में रहने वाले एक शख्स के बच्चे कश्मीर की एक कंपनी में काम करते हैं। उनका कहना है कि कश्मीर में मौजूदा समय में जो हालात बने हैं, वो डराने वाले हैं। उन्होंने भी अपने बच्चों से वापस आने के लिए बोल दिया है। बच्चों की चिंता में डूबे पिता का कहना है कि घाटी में हालात 1990 से भी ज्यादा खराब हैं क्योंकि चुन चुनकर हिन्दुओं को निशाना बनाया जा रहा है।

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