किसान आंदोलन- फिर मुकर्रर हुई अगली तारीख..बेनतीजा रही आज की बैठक..अब सुप्रीम कोर्ट करेगा हस्तक्षेप 

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आज फिर किसानों और सरकार के बीच हुई बैठक बेनतीजा रही। अगली तारीख 15 जनवरी की मुकर्रर हुई है। आज की बैठक में क्या कुछ हुआ । सब कुछ बताएंगे हम आपको लेकिन इससे पहले हम आपको बताते चले कि जिस तरह का रूख किसानों ने बैठक के दौरान दिखाया।  उसे देखते हुए अब सरकार ने किसानों को  सुप्रीम कोर्ट की दहलीज पर दस्तक देने की हिदायत दे डाली है,  लेकिन उधर किसानों का दो टूक कहना है कि वो कोर्ट का रूख नहीं करेंगे सरकार को यह कानून वापस लेने ही होंगे , मगर केंद्र सरकार का भी रूख स्पष्ट है कि किसी भी कीमत पर यह कानून वापस नहीं लिए जाएंगे। चाहे  कुछ भी हो जाए।  यह कानून हमारे लिए अहितकर है। अब आगे क्या कुछ होता है। यह तो 15 जनवरी की वार्ता के बाद ही तय हो पाएगा। ये भी पढ़े –अमेरिका हिंसा के दौरान तिरंगा लहराने वाले शख्स ने थरूर के साथ किया था लंच

बैठक मुकम्मल होने के बाद किसान नेता हनान मुला ने कहा कि सरकार ने हमें सुझाव दिया है कि हम कोर्ट जाए, लेकिन हम कोर्ट नहीं जाएंगे। सरकार को यह कानून वापस लेना ही होगा अन्यथा हमारी यह लड़ाई यथावत जारी रहेगी।  वहीं, इस संदर्भ में केंद्रीय कृृषि मंत्री नरेंद्र सिंह  तोमर ने कहा कि हम सब एक लोकतांत्रिक देश के  नागरिक हैं। हमारे देश में जब कोई कानून बनता है, तो पहले यह लोकसभा से पारित होता है। फिर, यह राज्यसभा के पास पहुंचता है अन्त में जब यह राष्ट्रपति के पास पहुंचता है, तब जाकर यह कानून की शक्ल  अख्तियार करता है। वहीं, एक लोकतांत्रिक देश में कानून की विवेचना करने का अधिकार सुप्रीम कोर्ट को दिया गया है। अब कोर्ट इस पर आखिरी सुनवाई करेगा। उधर, किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि सराकर ने इन कानूनों को वापस लेने से साफ इनकार कर दिया है, लिहाजा अब हम स्पष्ट कर देते हैं कि हमारा यह आंदोलन  तब तक जारी रहेगा , जब तक कि इन कानूनों को वापस नहीं लिया जाता है।

बहरहाल , सरकार के हालिया रूख को देखकर ऐसा प्रतीत होता हुआ नहीं दिख रहा है कि सरकार  इन कानूनों को वापस लेने के मूड में है। वहीं, किसान नेता भी साफ कर चुके हैं कि उनका यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक कि  यह कानून वापस नहीं लिए जाते हैं। अब देखना यह होगा कि अगली वार्ता में क्या कुछ  होता है।  क्या सरकार अपने रूख पर बरकरार रहने में कामयाब रहती है। या फिर किसानों का यह आंदोलन यूं ही जारी रहता है। ये भी पढ़े-वार्ता से पहले किसानों का ट्रैक्टर मार्च, कई रास्ते किए गए डायवर्ट