Saturday, October 16, 2021

नाराजगी के बाद भी वरूण गांधी को बीजेपी नहीं दे रही कोई एहमियत, क्या बदल लेंगे पार्टी

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बीजेपी सांसद वरुण गांधी और पार्टी के बीच काफी दूरियां आ गई है। पूर्व में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव रहे वरुण पिछले कई दिनों से पार्टी उन्हें अनदेखा कर रही है। उनको न तो संगठन में ही महत्वपूर्ण जगह मिल पा रही थी, न ही केंद्र सरकार में कोई जगह मिली थी। अब लखीमपुर खीरी की घटना के साथ भाजपा की नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी का गठन वरुण की नाराजगी का बड़ा कारण बनी है।

भाजपा ने वरूण गांधी को दिखाया बाहर का रास्ता

भाजपा द्वारा बनाई गई नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी में वरुण गांधी और मेनका गांधी दोनों को शामिल नहीं किया गया है। इसके पहले दोनों ही नेता इसमें शामिल थे। संगठन में उनके शामिल न होने की वजह उनकी घटती रुचि भी हो सकती है।varun gandhi again voices against bjp says lakhimpur violence is given  colour of hindu vs sikh - India Hindi News - वरुण गांधी के फिर बागी सुर,  कहा- लखीमपुर हिंसा को हिंदू वैसे भी कार्यकारिणी के फिर से निर्माण में 25 से 30 फीसद सदस्य बदले जाते हैं और इस बार भी पार्टी में कई प्रमुख नेताओं को बदला है।

बताया जा रहा है कि वरुण और उनकी मां मेनका गांधी, गांधी परिवार से संबंध रखते हैं, जिस वजह से उन्हें पार्टी से हटाया गया है। दरअसल मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में मेनका गांधी को मंत्री नहीं बनाया था। तभी से पार्टी और मेनका के बीच की दूरी समझ आने लगी थी। वरुण गांधी भी संगठन के कामों में ज्यादा रुचि नहीं ले रहे थे और हाल में उन्होंने उनका यह बयान भी चर्चा में रहा कि उन्हें नहीं मालूम था कि वह कार्यकारिणी में भी थे या नहीं।

अब जबकि उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव नजदीक पर आ गए है। इस समय वरुण गांधी के बयान भाजपा को असहज करने वाले हैं। हालांकि भाजपा नेतृत्व भी वरुण गांधी के बयानों को ज्यादा एहमियत नहीं दे रहा है। उनके किसी भी बयान पर कोई प्रतिक्रिया भी नहीं दी जा रही है। इससे यह साफ हो गया है कि भाजपा वरुण गांधी को लेकर बहुत ज्यादा गंभीर नहीं है।

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