दिल्ली सरकार की मदद से सिंघु बॉर्डर पर किसानों के लिए लगाया गया फ्री वाईफाई हॉटस्पॉट

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नई दिल्ली। नए कृषि कानून के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे किसानों की तुलना अगर शाहीन बाग प्रदर्शनकारियों से की जा रही है तो वह अकारण नहीं है। राजनीति पार्टियों की तरफ से शहीन बाग के प्रदर्शनकारियों की जिस तरह मदद की गई थी, उससे दस प्रदर्शन का लंबा खिंचना स्वाभाविक था। ठीक इसी तरह किसानों के प्रदर्शन के साथ भी हो रहा है। केंद्र सरकार जहां जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान ढूंढने में लगी है, किसानों संगठनों के नेताओं के साथ बैठकें कर रही है, वहीं विपक्ष की तरफ से इस धरने को खत्म न करने में किसानों की मदद की जा रही है। सिंघु बॉडर पर डेरा जमाए किसानों को जहां हर सुख-सुविधा मुहैया कराई जा रही है वहीं खराब नेट कनेक्टिविटी को दूर करने के लिए पांच फ्री वाईफाई हॉटस्पॉट भी लगवा दिए गए हैं। इससे अब पिछले 34 दिनों से यहां जमे किसान अपने परिजनों से आसानी से बातचीत कर सकेंगे। वीडियो कालिंग के जरिए अपने परिवारों से रूबरू हो सकेंगे। लेकिन ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि क्या विपक्ष ऐसा करके कड़के की ठंड में किसानों को बेघर रहने को मजबूर नहीं कर रहा है।

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सोशल मीडिया पर चल रही खबरों की मानें तो सिंघु बॉर्डर पर डेरा जमाए किसानों को खाने-पीने के साथ शराब भी फ्री में मिल रही है। रही बात खराब नेटवर्किंग की तो आम आदमी पार्टी के नेता और पंजाब के सह प्रभारी राघव चड्ढा ने उसे भी दूर कर दिया है। यहां उन्होंने पांच फ्री वाईफाई हॉटस्पॉट लगवाकर नेट कनेक्टिविटी की समस्या से निजात दिला दिया है। बता दें कि किसानों की तरफ से खराब कनेक्टिविटी की शिकायत पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एक दिन पहले किसानों को फ्री वाईफाई की सुविधा देने का एलान किया था। आप नेता राघव चड्ढा ने बताया कि किसानों की शिकायत के आधार पर कमजोर नेटवर्क वाले स्थानों की पहचान कर वहां वाईफाई हॉटस्पॉट लगाने की शुरुआत की गई है।

वहीं खबर है कि टिकरी बॉर्डर से भी किसानों की तरफ से ऐसी सुविधा मुहैया कराने की मांग उठ रही है। लेकिन प्रदर्शनकारी किसानों को यह सियासी दांव पेच कहा पता। सिंघु बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे किसानों की संख्या पंजाब से है और टिकरी बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे किसानों की संख्या देश के अन्य राज्यों से आए किसानों की है। हालांकि किसानों का यह पूरा प्रदर्शन राजनीतिक है। क्योंकि अधिकत्तर किसानों को यह नहीं पता कि वह किस लिए प्रदर्शन कर रहे हैं और वह आगे चाहते क्या हैं। टिकरी बॉर्डर पर डटे किसान अगर सिंघु बॉर्डर पर डटे किसानों को मिलनी वाली सुख-सुविधाओं से अपनी तुलना कर लें तो समझ में आ जाएगा कि भड़काने वाले राजनीतिक दल उनके साथ कितना भेदभाव कर रहे हैं।

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