Friday, October 22, 2021

भारत की इस घातक मिसाइल से कांपा चीन, UNSC से की शिकायत

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नई दिल्ली। भारत ने चीन की चिंता को बढ़ा दिया है। अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के न्यूक्लियर सबमरीन समझौते से चीन (China) भड़क गया है और उसने भारत की मिसाइल प्रोग्राम पर ही सवाल उठा दिए हैं। 1998 के परमाणु परीक्षण के बाद जारी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (United Nations Security Council) के प्रस्ताव का हवाला देते हुए ड्रैगन चिंता जताई है। चीन की चिंता इसलिए बढ़ी है क्योंकि आने वाले दिनों में भारत अग्नि-V इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण कर सकता है, जिसकी मारक क्षमता 5000 किलोमीटर है।

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चीन की चिंता इसलिए बढ़ी हुई है क्योंकि भारत की इस न्यूक्लियर मिसाइल की रेंज में चीन ड्रैगन के कई देश आ रहे हैं। चीन की मीडिया में इसे लेकर चिंता दिखाई दे रही है। भारत के आगामी मिसाइल परीक्षण को देखते हुए चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Zhao Lijian ने कहा कि कहा कि ‘​​भारत की न्यूक्लियर बैलिस्टिक मिसाइल का जहां तक सवाल है तो UNSCR 1172 में पहले से ही स्पष्ट शर्तें मौजूद हैं। सभी देशों की जिम्मेदारी है दक्षिण एशिया में शांति, सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखना। चीन भी इस बात की उम्मीद करता है कि सभी देश इस मामले में लगातार कोशिश करेंगे।’

चीन जिस UNSC प्रस्ताव 1172 जिक्र रहा है, वो 1998 में भारत के परमाणु परीक्षणों के बाद इस प्रस्ताव को लाया गया था। इसमें लिखा था कि भारत और पाकिस्तान अपने परमाणु हथियार विकास कार्यक्रम को तुरंत बंद करेंगे और न्यूक्लियर शस्त्रीकरण से परहेज करेंगे। वहीं परमाणु हथियारों की तैनाती, बैलिस्टिक मिसाइलों के विकास और परमाणु हथियारों के लिए इस्तेमाल में होने वाली सामग्री के किसी भी रूप में उत्पादन पर भी रोक लगाई जाएगी।

चीन एक तरफ जहां भारत को मिसाइल कार्यक्रम के संबंध में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव का हवाला दे रहा है। वहीं दूसरी ओर वो खुद पिछले कुछ दशकों से पाकिस्तान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों में सहायता करता आया है और उसे न्यूक्लियर मिसाइलों के लिए टेक्नोलॉजी के साथ यूरेनियम की सहायता पहुंचाई है।

चीन ने बिना की रोकटोक के पाकिस्तान की मदद की है और इसे तीन वर्ष पहले खुद उसने आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया है। चीन एकेडमी ऑफ साइंस ने 2018 में घोषणा की थी कि उसने पाकिस्तान को एक ट्रैकिंग सिस्टम बेचा है जो पाकिस्तान को मल्टी-वॉरलेड मिसाइलों के विकास में काफी मदद कर सकता है।

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