अमेरिकी निवेशको की पहली पसंद बनता जा रहा चीन, जानें ताकत…

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China

 

चीन (China) को यह बात जानकर बड़ी ही खुशी होगी कि वह यूरोपियन यूनियन (ईयू) की सबसे बड़ा व्यापारिक (Business) साझेदार बन गया है। यूरोपियम यूनियन की सांख्यिकी एजेंसी- यूरोस्टैट- के मंगलवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक 2020 में चीन और ईयू के बीच 383.5 यूरो का कारोबार हुआ।

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ईयू का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार

ईयू से चीन को हुए निर्यात में 2.2 फीसदी की वृद्धि हुई, जबकि चीन से होने वाले आयात में 5.6 फीसदी का इजाफा हुआ। इन सब में चीन ने अमेरिका को भी छोड़ दिया है। इसके पहले तक अमेरिका हमेशा से ईयू का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार रहा था। लेकिन पिछले साल ईयू से अमेरिका को आयात निर्यात में काफी गिरावट आई थी।

अमेरिकी अर्थशास्त्रियों का कहना है कि चीन में विदेशी निवेश तेजी से बढ़ रहा है। चीन के बाजारों में विदेशी निवेशक अपना पैसा बड़े पैमाने पर लगा रहे हैं। खासकर अमेरिकी निवेशकों के लिए चीन पसंदीदा जगह बना हुआ है। बताया जा रहा हैं, कि इसकी वजह चीन का कोरोना महामारी को जल्द संभाल लेना और उसके बाद वहां की अर्थव्यवस्था में आई तेजी है। जिससे निवेशको को लगता हैं कि हमारा पैसा वेस्ट नहीं होगा।

राजनीतिक ताकत का करना पड़ेगा सामना

विशेषज्ञों की दी जानकारी के मुताबिक चीन के बाजारों में निवेश बढ़ने पर दुनिया भर की सरकारों को इसकी वजह से चीन की बढ़ी राजनीतिक ताकत का सामना करना होगा। यह अमेरिका के लिए बड़ी ही चिंताजनक बात है, क्योंकि चीन धीरे-धीरे दुनिया पर कायम उसके वित्तीय वर्चस्व को चुनौती देने की तरफ बढ़ रहा है। अमेरिका स्थित सीफेरर कैपिटल पार्टनर्स में चीन अनुसंधान केंद्र के निदेशक निकोलस बोर्स्ट ने अमेरिकी वेबसाइट एक्सियोस.कॉम से कहा है कि चीन का असली मकसद अपनी मुद्रा रेनमिनबी को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बनाना है। उनके मुताबिक जब ज्यादा विदेशी निवेशक चीन की ऐसी कंपनियों, चीन सरकार के बॉन्ड्स और दूसरी प्रतिभूतियों में निवेश करेंगे, जहां कारोबार रेनमिनबी में होता है, तो वैसी हालत में रेनमिनबी का भंडार रखना उनकी मजबूरी बन जाएगी।

बोर्स्ट ने कहा कि निवेशक जितना अधिक चीनी संपत्तियों की खरीदारी करेंगे, उनके लिए चीन की मुद्रा उतनी अहम हो जाएगी। अर्थशास्त्रियों ने अवगत कराया है कि जैसे-जैसे चीन का घरेलू बाजार बढ़ा है, वहां कारोबार करने वाली एयरलाइंस कंपनियां, होटल और हॉलीवुड के कारोबार से जुड़े लोग चीन के खिलाफ बोलने से कतराने लगे हैं। अब ऐसा ही वित्तीय निवेशकों के साथ हो सकता है।

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