चमोली आपदा : इतनी बड़ी संख्या में लापता हुए लोग, स्थानीय निवासियों ने बताए तबाही के कारण

230
Disaster

चमोली की ऋषिगंगा (Rishiganga )में अचानक आई बाढ़ ने चारों तरफ तबाही (Destruction) मचा कर रखी हैं। कई टीमें वहा पर आई तबाही का पता लगाने जुटी हुई हैं। साथ ही वैज्ञानिक शोध भी हो रहे हैं, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां तो पर्यावरण नियमों को ताक पर रखकर कंपनियां यहां काम करती रही हैं। कंपनियां यहां भारी विस्फोट करतीं थीं और परियोजना निर्माण का मलबा भी ऋषिगंगा में ही डंप किया जाता था। इस कारण भी आपदा का रूप भयानक हो सकता हैं।

इसे भी पढ़ें- सोने की कीमत में भारी गिरावट, 8 महीने के सबसे निचले स्तर पर पहुंचा गोल्ड

बरामद हुए 58 शव

ऋषिगंगा की इस बड़ी आपदा में सरकारी आंकड़ों के अनुसार 204 लोग लापता हुए, साथ ही जिसमें अभी तक 58 शव ही मिले हैं। बाकी लोगों को तलाशने का काम जोरों से चल रहा हैं। स्थानीय लोगों का कहना हैं कि अगर यहां सब लोग पर्यावरण के नियमानुसार सारे काम करते तो ऐसा कभी नहीं होता। हम लोगों को इस तबाही का सामना नहीं करना पड़ता। कितने लोगों ने इस तबाही में अपनी जाने गवाई होंगी। स्थानीय निवासी संग्राम सिंह सहित अन्य लोग कहते हैं कि ऋषिगंगा पावर प्रोजेक्ट और तपोवन जल विद्युत परियोजना का निर्माणदायी कंपनियों ने हर स्तर पर मानकों का उल्लंघन किया।

ऋषिगंगा में डंप होता था मलबा

यहां जितनी भी कंपनियां क्षेत्र थे वो लगातार भारी विस्फोट करती थीं। साथ ही इस परियोजना निर्माण में निकलने वाले मलबे को भी ऋषिगंगा नदी में ही डंप कराया जाता हैं। वहां को लोगों ने कई बार इस काम को लेकर आवाजे उठाई लेकिन उनकी आवाज को दबा दिया गया। उसी का नतीजा आज हमारे सामने हैं। जिसमें कसूर और बेकसूर दोनों लोगों को नतीजा भुगतना पड़ा।

10 दिन पूर्व आई आपदा में मलबे के ढेर में ऋषि गंगा पावर प्रोजेक्ट का कुछ पता ही नहीं चल रहा था। अब यहां पर लोगों की तलाश में मलबा हटाने का काम चल रहा है। आपदा प्रभावित क्षेत्र तपोवन और रैणी क्षेत्र में आपदा के बाद से ही विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों ने पीड़ित परिवारों और बचाव कार्य में लगे कर्मियों के लिए भंडारे की व्यवस्था की थी। जिससे आपदा की चपेट में आए लोगों को खाने की कोई परेशानी नहीं हो।  शुरुआत में यहां काफी संख्या में भंडारे लगाए गए थे, लेकिन जैसे ही दिन बीत रहे हैं यहां भंडारे की संख्या में कम होती जा रही है। लगभग सारे भंडारे यहां से उठ चुके हैं। सिर्फ प्रशासन और एक दो  संगठनों के ही भंडारे चल रहे हैं।

इसे भी पढ़ें-पूछताछ में दिशा रवि के साथियों का खुलासा, शामिल हैं इतने नामी लोग