हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, पत्नी से पैसे मांगना उत्पीड़न नहीं, दोषी को किया रिहा

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नागपुर। समय के अनुसार कानून की व्याख्या भी बदल गई है। यही वजह है कि कल तक जो काम गैरकानूनी हुआ करते थे वह आज जायज होते जा रहे हैं। ऐसे में बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने अहम फैसला देते हुए कहा है कि पत्नी से पैसे मांगने को उत्पीड़न की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। इसी टिप्पणी के साथ ही कोर्ट ने पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपी को रिहा करने का आदेश दिया है। जस्टिस पुष्पा गनेडीवाला ने याचिकाकर्ता प्रशांत जारे के रिहा करने का आदेश देते हुए कहा कि यह मामला पति—पत्नी के बीच झगड़े से जुड़ा हुआ है। इस मामले में पति पैसे के लिए पत्नी के साथ मारपीट करता था। ऐसे में पत्नी से पैसे की मांग करने को धारा 498A के तहत उत्पीड़न की श्रेणी में नहीं लाया जा सकता है।

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इस मामले में सुनवाई करते हुए जज ने कहा कि आरोपी अपनी पत्नी को जाने देने की जगह उसका साथ चाहता था। झगड़ा होने पर अक्सर वह उसे उसके पिता के घर से आता था। इतना ही नहीं आरोपी ने उसे हॉस्पिटल भी लेकर गया और अंतिम संस्कार के लिए उसके शव तक को पिता को देने से इनकार कर दिया। बताते चलें कि जस्टिस पुष्पा गनेडीवाला ने बीते दिनों नाबालिग लड़की के ब्रेस्ट को बिना स्किन टू स्किन संपर्क के टच किए जाने को यौन अपराध की श्रेणी में नहीं रखने का फैसला दिया था।

गौरतलब है कि कपल की शादी वर्ष 1995 में हुई थी। 12 नवंबर, 2004 को दोनों के बीच हुए विवाद के बाद पत्नी ने आत्महत्या कर ली थी। वहीं मृतक के पिता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराकर आरोप लगाया था कि दहेज की लालच में पति उसका उत्पीड़न करता था। इसी मामले में यवतमाल सत्र न्यायालय ने वर्ष 2008 में आत्महत्या के लिए उकसाने और उत्पीड़न के तहत पति को दोषी ठहराते हुए चार साल जेल की सजा सुनाई थी। आरोपी ने इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।

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