Saturday, October 16, 2021

भारत रत्न “अजेय अटल – सदैव अटल’’ चिरस्मरणीय रहें!! डॉ. राकेश मिश्र

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भारतीय राजनीति के युगपुरुष, श्रेष्ठ राजनीतिज्ञ, कोमल हृदय संवेदनशील साहित्यकार, भारत माता के सच्चे सपूत, अजातशत्रु पूर्व प्रधानमन्त्री श्री अटल बिहारी बाजपेयी जी का महाप्रयाण आज ही के दिन 16 अगस्त 2018 को हुआ था। उनका व्यक्तित्व हिमालय के समान विराट था। अटल जी देश के लोगों के जीवन में अपने विचारों का प्रभाव डाला जो नौजवानों को सदा राह दिखाता रहेगा। उनकी ईमानदारी, शालीनता, सादगी और सौम्यता से हर कोई प्रभावित होता था है । भारत के लोकप्रिय प्रधानमंत्री के रूप में देश के आर्थिक विकास और गरीब वर्ग के सामाजिक कल्याण के लिए उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। उनकी अटल आवाज और उनके महान कार्य हमेशा राष्ट्र के बीच अमर रहेंगे। भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी सच्चे मायने में भारत के रत्न थे। उन्होंने जमीन से जुड़े रहकर राजनीति की और लोगों के दिलों में अपनी जगह बनाई थी। Read also:- ध्वजारोहण के बाद सपा सांसद एसटी हसन भूले राष्ट्रगान, वीडियो वायरल

अटल बिहारी वाजपेयी जी ने आजीवन अविवाहित रहने का निर्णय लिया, जिसका निर्वहन किया। भारत की राजनीति में मूल्यों और आदर्शों को स्थापित करने वाले राजनेता और प्रधानमंत्री के रूप में अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यों की बदौलत ही उन्हें भारत के विकास का दूरदृष्टा कहा गया है। विरोधियों का भी दिल जीत लेने वाले बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी अटल बिहारी वाजपेयी का सार्वजनिक जीवन बहुत ही बेदाग और साफ सुथरा था, इसी छवि और साफ सुथरे सार्वजनिक जीवन की वजह से अटल बिहारी वाजपेयी जी का हर कोई सम्मान करता था। यहां तक कि उनके विरोधी भी उनके प्रशंसक थे। अटल जी के लिए राष्ट्रहित सदा सर्वोपरि रहा। अटल बिहारी वाजपेयी जी जब भी संसद में अपनी बात रखते थे, तो उनके विरोधी भी उनकी तर्कपूर्ण वाणी के आगे कुछ नहीं बोल पाते थे अपनी कविताओं के जरिए अटल जी हमेशा सामाजिक बुराइयों पर प्रहार करते रहे।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक से लेकर प्रधानमंत्री तक का सफर तय करने वाले युग पुरुष अटल बिहारी वाजपेयी जी का जन्म ग्वालियर में 25 दिसम्बर 1924 को हुआ। अटल जी के पिता का नाम पण्डित कृष्ण बिहारी वाजपेयी और माता का नाम कृष्णा वाजपेयी था। पिता पण्डित कृष्ण बिहारी वाजपेयी ग्वालियर में अध्यापक थे। कृष्ण बिहारी वाजपेयी हिन्दी व ब्रज भाषा के सिद्धहस्त कवि थे। अटल बिहारी वाजपेयी जी की बीए की शिक्षा ग्वालियर के वर्तमान में लक्ष्मीबाई कालेज के नाम से जाने वाले विक्टोरिया कालेज में हुई। ग्वालियर के विक्टोरिया कालेज से स्नातक करने के बाद अटल बिहारी वाजपेयी ने कानपुर के डीएवी महाविद्यालय से कला में स्नातकोत्तर उपाधि भी प्रथम श्रेणी में प्राप्त की।

एक प्रखर वक्ता और कवि के गुण उन्हें उनके पिता से मिले। स्कूल में होने वाली वाद-विवाद, काव्य पाठ और भाषण जैसी प्रतियोगिताएं में हमेशा हिस्सा लेते थे। अटल बिहारी वाजपेयी छात्र जीवन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक बने। अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने जीवन में पत्रकार के रूप में भी काम किया और लम्बे समय तक राष्ट्रधर्म, पांचजन्य और वीर अर्जुन आदि राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत अनेक पत्र-पत्रिकाओं का सम्पादन भी किया। अटल बिहारी वाजपेयी जी भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्य थे और उन्होंने लंबे समय तक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय जैसे प्रखर राष्ट्रवादी नेताओं के साथ काम किया।

अटल बिहारी वाजपेयी सन् 1968 से 1973 तक भारतीय जनसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे। 1957 के लोकसभा चुनावों में पहली बार उत्तर प्रदेश की बलरामपुर लोकसभा सीट से जनसंघ के प्रत्याशी के रूप में विजयी होकर लोकसभा में पहुँचे। अटल जी 1957 से 1977 तक लगातार जनसंघ संसदीय दल के नेता रहे। अटल बिहारी वाजपेयी जी ने अपने ओजस्वी भाषणों से प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू तक को प्रभावित किया। एक बार अटल बिहारी वाजपेयी के संसद में दिए ओजस्वी भाषण को सुनकर पंडित जवाहर लाल नेहरू ने उनको भविष्य का प्रधानमंत्री तक बता दिया था और आगे चलकर यह भविष्यवाणी सच साबित हुई।

अटल बिहारी वाजपेयी का व्यक्तित्व बहुत ही मिलनसार था। 1975 में इंदिरा गाँधी द्वारा आपातकाल लगाने का अटल बिहारी वाजपेयी ने खुलकर विरोध किया था। 1977 के लोकसभा चुनाव के बाद देश में पहली बार गैर कांग्रेसी सरकार मोरारजी देसाई के नेतृत्व में जनता पार्टी की सरकार बनी, जिसमें अटल जी को विदेश मंत्री बनाया गया। बतौर विदेशमंत्री उन्होंने पूरे विश्व में भारत की छवि बनाई। विदेश मंत्री के रूप में संयुक्त राष्ट्र में हिंदी में भाषण देने वाले देश के पहले वक्ता बने।

1980 में जनता पार्टी के टूट जाने के बाद अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने सहयोगी नेताओं के साथ भारतीय जनता पार्टी की स्थापना की। अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। 1996 के लोकसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी सबसे बड़े दल के रूप में उभरी। भाजपा द्वारा सर्वसम्मति से संसदीय दल का नेता चुने जाने के बाद अटलजी देश के प्रधानमंत्री बने। दुर्भाग्यवश यह सरकार 13 दिन तक ही चली। 1998 में भाजपा फिर दूसरी बार सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी और अटल बिहारी वाजपेयी दूसरी बार देश के प्रधानमंत्री बने। लेकिन 13 महीने बाद उनकी सरकार गिर गयी। इस बीच अटल बिहारी वाजपेयी ने प्रधानमंत्री रहते हुए दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचय देते हुए पोखरण में परमाणु परीक्षण कर सम्पूर्ण विश्व को भारत की शक्ति का एहसास कराया। अमेरिका और यूरोपीय संघ समेत कई देशों ने भारत पर कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए, लेकिन उसके बाद भी भारत अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में हर तरह की चुनौतियों से सफलतापूर्वक निबटने में सफल रहा।

कारगिल युध्द में विजयश्री के बाद हुए 1999 के लोकसभा चुनाव में भाजपा फिर अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी। सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने के बाद भाजपा ने अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में 13 दलों से गठबंधन करके राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के रूप में सरकार बनायी। अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने अपना पूरा पांच साल का कार्यकाल पूर्ण किया। इस कार्यकाल में देश के अन्दर प्रगति के अनेक आयाम छुए।

अटल जी की सरकार ने भारत के चारों कोनों को सड़क मार्ग से जोड़ने के लिए स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना की शुरुआत की और दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई व मुम्बई को राजमार्ग से जोड़ा गया। अटल जी को देश-विदेश में अब तक अनेक पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने 2015 में भारत के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को उनके घर जाकर सम्मानित किया। अटल जी को देश-विदेश में अब तक अनेक पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। 2015 में भारत के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को सम्मानित किया गया।

आज उनकी पुण्यतिथि पर उनकी पंक्तियों को याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं-
मैंने जन्म नहीं मांगा था!
मैं ने जन्म नहीं मांगा था, किन्तु मरण की मांग करूंगा।
जाने कितनी बार जिया हूँ, जाने कितनी बार मरा हूं।
जन्म मरण के फेरे से मैं, इतना पहले नहीं डरा हूं ।
अन्तहीन अंधियार ज्योति की, कब तक और तलाश करूंगा।
मैंने जन्म नहीं माँगा था, किन्तु मरण की मांग करूँगा।
बचपन, यौवन और बुढ़ापा, कुछ दशकों में ख़त्म कहानी।
फिर-फिर जीना,फिर-फिर मरना,यह मजबूरी या मनमानी?
पूर्व जन्म के पूर्व बसी-दुनिया का द्वारचार करूंगा।
मैंने जन्म नहीं मांगा था, किन्तु मरण की मांग करूंगा।

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डॉ. राकेश मिश्र,कार्यकारी सचिव,पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष,भारतीय जनता पार्टी

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