विरासत : 22 भाषाओं को मिलेगी यह पहचान, 2021 सत्र से शामिल हुई मातृभाषा

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भारत देश धारे-धारे अपनी मातृभाषा (Mother toungue) को भूलता ही जा रहा है। अगर ऐसा ही रहा तो कब हमारी मातृभाषा हिंदी विलुप्त (Extinct) हो जाएगी पता भी नहीं चलेगा। इसके लिए हमारी सरकार ने कमद उठाया है कि सभी स्कूलों में इसको महत्वता दी जाए। भारतीय छात्र अगले सत्र से मातृभाषा में पढ़ाई करेंगे। नई शिक्षा नीति 2020 के तहत शैक्षणिक सत्र 2021 सत्र से स्कूलों में पांचवी कक्षा तक अनिवार्य है अगर राज्य चाहे तो वह आठवीं तक भी मातृभाषा में पढ़ाई करवा सकेंगे।

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मातृभाषा में होगी मेडिकल पढ़ाई

यहीं नहीं सरकार ने यह भी कहा कि चुनिंदा आईआईटी और एनआईटी के छात्रों को अपनी मातृभाषा में बीटेक प्रोग्राम की पढ़ाई का मौका मिल रहा है। सबके लिए खास तौर पर मेडिकल के छात्रों के लिए है कि अब से मेडिकल की पढ़ाई मातृभाषा में करवाने की योजना बनाई जा रही है।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिशा-निर्देशों के तहत मेडिकल और इंजीनियरिंग की पढ़ाई मातृभाषा में होगी। ऐसा करने का सिर्फ यह मकसद है कि दूर –दराज अगल छोर में बैठे सरकारी स्कूल से पढ़ाई करने वाले छात्र को आगे बढ़ाने के साथ उसके माध्यम से उस भाषा को अलग पहचान दिलाने का भी है।

मातृभाषा से निखरे बच्चों का भविष्य

वैज्ञानिकों के आधार पर यूनेस्को का भी यही मानना है कि शुरूआती पढ़ाई मातृभाषा में ही होनी चाहिए। इसी के चलते नई शिक्षा नीति में प्रावधान किया गया है। अपने देश की मातृभाषा से प्रारंभिक पढ़ाई करवा कर बच्चे की प्रतिभा को निखारा जा सकता है। बंगाली, कन्नड़, पंजाबी, तमिल, तेलगू, गुजराती, राजस्थानी समेत 22 भाषाओं की अपनी एक अलग पहचान है। यह विविधता में एकता को दर्शाती हैं। राज्य सरकार चाहें तो स्कूल से लेकर उच्च शिक्षा तक पूरी पढ़ाई अपनी मातृभाषा में करवा सकती हैं।

22 भाषाओं को मिलेगी अपनी पहचान 

सरकार ने भारतीय भाषाओं को विलुप्त होने से बचाने के लिए केंद्रीय बजट 2021 में उनके संरक्षण और अनुवाद के लिए विशेष प्रावधान किया गया है। जिमसे कई अलग-अलग शहरों में केंद्र बनाए जायेंगे। जिनके माध्यम से विलुप्त 22 भारतीय भाषाओं को शोध व पहचान दिलाने पर काम होगा।

डिग्री में शामिल होंगे अंक

एक राज्य के छात्र को दूसरे राज्यों की भाषा, संस्कृति, खान-पान से जोडने वाला एक भारत-श्रेष्ठ भारत योजना 2021 से यूनिवर्सिटी, आईआईटी, आईआईएम में भी लागू होगा। इस प्रतियोगिता के अंक भी दिए जाएंगे। बाद में छात्र के डिग्री में उन अंको को भी शामिल किया जाएगा। इसका सीधा लाभ कैंपस प्लेसमेंट या नौकरी के दौरान होगा। दरअसल मल्टीनेशनल कंपनी अब ऐसे युवाओं को प्राथमिकता दे रही हैं, जोकि मल्टीकल्चर माहौल में आसानी से मेलझोल बना कर रह सकें।

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