टिकैत के आंसुओं ने आंदोलन में फूंकी जान, पराठे, छाछ और अचार लेकर गाजीपुर बॉर्डर पहुंचे किसान

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किसान आंदोलन की कमजोर पड़ती स्थिति को लेकर भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के नेता राकेश टिकैट का भावुक होना यूपी के किसानों को भी भावुक कर गया और प्रदर्शन में जान फूंकने का काम किया। नए कृषि कानून के खिलाफ आंदोलन कर रहे राकेश टिकैत के लिए लोग मिट्टी के घड़े में पानी, पराठा, छाछ और अचार लेकर प्रदर्शन स्थल पर पहंचे गए हैं। वहीं, टिकैत ने शनिवार को केंद्र सरकार ने इंटरनेट सेवाओं को बहाल करने का आग्रह किया।
गाजियाबाद के एक गांव का एक लड़का घर के बने पराठों और पानी के साथ अचार से भरा टिफिन लेकर आंदोलन स्थल पर पहुंचा हुआ था। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर, ग्रेटर नोएडा और मेरठ जैसे स्थानों से भी कुछ ग्रामीण भी प्रदर्शनकारियों को खिलाने के लिए मिट्टी के बर्तन में पानी और छाछ के साथ गाजीपुर सीमा पर पहुंचे। यह भी पढ़ें:- पाकिस्तानी आर्मी के जनरल ने कबूला सच, आंदोलन को खत्म कराना चाहता है चीन

बता दें कि गाजीपुर सीमा पर आंदोलन पर बैठे किसानों को प्रदर्शन खत्म करने का अल्टीमेटम देने के बाद स्थानीय प्रशासन की ओर से बिजली और पानी की आपूर्ती भी ठप कर दी गई थी। जिसके बाद टिकैत ने कहा था कि वह तभी पानी पीएंगे जब किसान अपने गांव से लेकर आएंगे और आंदोलन जारी रखेंगे।

दरअसल, टिकैत को जब प्रशासन की ओर से अल्टीमेट मिला तो वो भावुक हो गए और रोने लगे थे। टिकैत ने कहा कि आंदोलन खत्म करने की बजाय वो आत्महत्या कर लेंगे। टिकैत ने आरोप लगाया कि किसान आंदोलन को कमजोर करने की साजिश रची जा रही है।

बुलंदशहर के चरौरा गांव के प्रमुख पंकज प्रधान (52) सहित कई किसानों ने ‘पीटीआई-भाषा से बातचीत में कहा, हमारे गांव में लोग रातभर नहीं सोए। हम कैसे सो सकते थे। उनका भावुक होना हमारे दिल को छू गया। उसी रात हम लोगों ने टिकैत जी को पानी देने के लिए प्रदर्शन स्थल गाजीपुर बॉर्डर जाना शुरू कर दिया। उनके आंसू देखकर हमारे भी आंसू आ गए।
शनिवार को बुलंदशहर से प्रदर्शन स्थल पर आए ज्ञानेंद्र सिंह ने कहा कि टिकैत को भावुक होता देखकर वह भी भावुक हो गए। उन्होंने कहा, यह अकेले उनके आंसू नहीं थे, यह हम सभी संघर्षरत किसानों के आंसू थे। इसलिए मैंने फिर से यहां आने का फैसला किया। मैं गणतंत्र दिवस ट्रैक्टर परेड के बाद वापस चला गया था, इसलिए नहीं कि मंगलवार को दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद मैंने आंदोलन में विश्वास खो दिया था, बल्कि हम केवल परेड के लिए आए थे। यह भी पढ़ें:- कल से पूरी क्षमता के साथ खुल जाएंगे सिनेमा हाल, ऑनलाइन टिकट बुकिंग पर होगा फोकस

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