प्रेग्नेंसी के बाद होने वाली शारीरिक परेशानियों को दूर करे यह आसन

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जो महिलाएं (women) अपने फिगर को लेकर का सक्रिय रहती है वो किसी भी तरह का रिक्स नहीं लेना चाहती है। लेकिन एक ऐसा समय आता है जब उन्हें फिटनेस को लेकर समझौता करना पड़ता है। महिलाएं मां बनने के टाइम पीरियड में बच्चें के स्वास्थ्य (Health) के लिए अच्छी से अच्छी डाइट लेती है,ताकि उनका बच्चा स्वस्थ रहें। ऐसे में उनका बॉडी स्टेक्चर बिलकुल बदल जाता हैं। जिन महिलाओं की इस समय पर अच्छा खान पान नहीं रहता उनको बहुत सी मुसीबतों का सामना करना पड़ता है।

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जिस पर महिलाओं को प्रेग्नेंसी के बाद अपने स्वास्थ्य का ज्यादा ख्याल रखने की जरूरत होती है। प्रेग्नेंसी के बाद महिलाओं की बॉडी में कई तरह के हार्मोनल बदलाव आते है, जिससे महिलाओं के शरीर में कई सारी दिक्कतें पैदा हो जाती हैं, जैसे मूड स्विंग्स, बाल झड़ना, अनिद्रा और इत्यादि। डिलीवरी के बाद महिला को रिकवर और दोबारा नॉर्मल होने में थोड़ा समय लगता है। इस दौरान महिला में हॉर्मोन्स असंतुलन होने के बहुत सारे लक्षण दिखाई देते हैं, जिनसे महिलाओं को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ता हैं। इन सारी परेशानियों को महिलाएं ये कुछ आसान करके ठीक कर सकती हैं। महिला के शरीर में हार्मोन का संतुलन भी ठीक बना रहेगा।

भुंजगासन

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डिलीवरी के बाद अक्सर महिलाओं को कमर में दर्द की शिकायत ज्यादा रहती हैं। ऐसे में भुंजगासन आपके लिए रामबाण का काम करेगा। इस आसन के अभ्यास से आपके हाथ, कंधे, रीढ़ की हड्डी और नितंबों भी मजबूत आती हैं। भुजंगासन सूर्यनमस्कार और पद्मसाधना का एक महत्त्वपूर्ण आसान है जो हमारे शरीर के लिए बेहद फायदेमंद है। यह छाती और कमर की मासपेशियो को लचीला बनाता है । स्त्रियों में यह गर्भाशय में खून के दौरान को नियंत्रित करने

उष्ट्रासन

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प्रेग्नेंसी के बाद उष्ट्रासन करना बेहद फायदेमंद है। यह शरीर की सभी प्रमुख मांसपेशियों को मजबूत करने के साथ, प्रसव के बाद पेट के चारों ओर वजन कम करने में सहायक है। प्रसव के बाद बढ़े हुए वजन को कम करने के लिए आप इस योगासन का सहारा ले सकती हैं।

हमारे शरीर को मानसिक एवं शारीरिक रूप से स्वस्थ बनाए रखने के लिए उष्ट्रासन एक उपयोगी आसन है। भारी शरीर की वजह से हमे बहुत से कामों में दिक्कतें आती है, जिसकी वजह से गुस्सा भी बहुत आता है। इस आसन को उष्ट्रासन इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस आसन को करते समय हमारा  शरीर ऊंट की भाति दिखाई देता है।

इसका अभ्यास करने के लिए अपनी रीढ़ को सीधा रखते हुए योगा मैट पर घुटने मोड़ें और कूल्हों के नीचे घुटने रखें। साँस छोड़ते हुए धीरे−धीरे पीछे की ओर झुकें, अपने पैरों को एक के बाद एक अपनी हथेलियों से स्पर्श करें। आपके कंधे, छाती और बाहों को पीठ के निचले हिस्से पर बने एक महत्वपूर्ण आर्च के साथ बढ़ाया जाना चाहिए। सामान्य रूप से सांस लेते हुए इस स्थिति में लगभग 8 सेकंड तक रूक़ें। इसके बाद सामान्य अवस्था में आ जाएं। इसको प्रतिदिन करने से कुछ ही दिनों में आपको लाभ समझ आयेगा।

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