म्यांमार तख्तापलट : जानें, मिन आंग लाइंग मिडिल क्लास रैंक से कैसे बने सेना प्रमुख, अब संभालेंगे देश की बागडोर

51
army

रंगून। पाकिस्तान की तरह म्यांमार में भी हमेशा से सेना का दबदबा रहा है और अब उसी के नक्शे कदम पर चलते हुए सेना ने यहां पर तख्तापलट कर सत्ता पर कब्जा कर लिया। अब देश की बागडोर यहां के सेना प्रमुख सीनियर जनरल मिन आंग लाइंग के हाथों में है। तख्तापलट होते ही देश में एक साल के लिए आपातकाल लगा दिया गया। अब यहां अगले साल चुनाव होगा।

हमेशा रहा सेना का दबदबा 

गौरतलब है कि म्यांमार में हमेशा से ही सेना का दबदबा रहा है। साल 1962 में यहां सेना ने तख्तापलट किया था, तब से करीब 50 साल तक सेना ने देश पर राज किया है। इसके साथ ही साल 2008 में सेना ने जब देश का संविधान बनाया तब सेना की एक स्थायी भूमिका तय कर दी थी, जिसके तहत संसदीय सीटों पर सेना के लिए 25 प्रतिशत का कोटा निर्धारित कर दिया। यही नहीं देश के प्रमुख विभागों जैसे के रक्षा मंत्रालय, गृह मंत्रालय और सीमा मामलों में मंत्रियों कि नियुक्ति का अधिकार सेना प्रमुख के हाथ में रखा गया।

इसे भी पढ़ें:-NSA चीफ अजीत डोभाल ने तोड़ी पूर्वोत्तर में उग्रवाद की कमर, म्यांमार ने सौंपे 22 उग्रवादी

अब बात करें वर्तमान सेना प्रमुख मिन आंग लाइंग की तो इन्होंने 1974 में मिलिटरी यूनिवर्सिटी डिफेंस सर्विसेज एकेडमी (डीएसए) जॉइन की थी। इनकी उम्र इस सकी 64 साल है और इन्होने1972-74 तक यंगून यूनिवर्सिटी में कानून की पढ़ाई की थी। सेना प्रमुख लाइंग के बारे में बात करते हुए साला 2016 में उनके एक क्लासमेट में एक न्यूज़ एजेंसी को बताया था कि लाइंग हमेशा से ही काम बोलना पसंद करते हैं और खुद को हमेशा चर्चा से दूर रखते हैं। वह बताते हैं कि जब यूनिवर्सिटी के सभी छात्र प्रदर्शन करते थे मिन आंग लाइंग तब देश की मिलिटरी यूनिवर्सिटी डिफेंस सर्विसेज एकेडमी (डीएसए) जॉइन करने के लिए आवेदन देने व्यस्त रहते थे।

1974 में मिली थी सफलता 

मिन आंग लाइंग को उनके इस काम में तीसरी बार साल 1974 में सफलता मिली। मिन के डीएसए क्लास के एक अन्य छात्र ने रॉयटर्स को बताया कि वह एक औसत कैडेट थे लेकिन धीरे-धीरे पर लगातार उन्हें प्रमोशन मिलते रहे। लाइंग के साथी इस बात पर हैरानी जाहिर करते हैं कि कैसे मिडिल रैंक्स से वह म्यांमार की सेना के प्रमुख बन गए।

इसे भी पढ़ें:-गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में आतंकी हमले के साथ ब्लैकआउट का भी खतरा