भारत-चीन सीमा विवाद खत्म, एलएसी पर पीछे हटी चीनी सेना, जानें कैसे बनी बात

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नई दिल्ली। पूर्वी लद्दाख के गलवान घाटी में पिछले नौ महीने से चल रहा भारत-चीन सीमा विवाद अब ख़त्म होता नजर आ रहा है। चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने पैंगोंग झील के उत्तरी और दक्षिणी किनारों पर से अपनी सेनाएं हटाना शुरू कर दिया है। सीमा पर इस तरह तेजी से कदम पीछे कर रही चीनी सेना को देखकर हर कोई हैरान हो रहा है।

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बता दें कि भारत और चीन के बीच पैंगोंग झील के उत्तरी और दक्षिणी तट पर देवों देशों की सेनाओं के पीछे हटने का फैसला हो गया है। इस समझौते के तहत अब दोनों देशों की सीमाएं वहां से पीछे हट रही है। इसी कड़ी में चीनी सेना ने गुरुवार तक पैंगोंगत्सो के दक्षिण तट से करीब दो सौ युद्धक टैंकों को वापस कर लिया, जबकि लद्दाख के फिंगर 8 के उत्तरी तट से अपने सैनिकों को वापस ले जाने के लिए 100 भारी वाहन तैनात किए हैं।

एक्सपर्ट का कहना है कि भारत और चीन के बीच यह समझौता विदेश मंत्री जय शंकर प्रसाद और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल सहित दोनों देशों के शीर्ष अधिकारियों और समकक्षों के बीच हुई कई दौर की बैक-चैनल वार्ता के बाद हुआ।

आकस्मिक योजनाएं तैयार हैं

केंद्र सरकार के एक वरिष्ठ सदस्य ने बताया कि ‘बुधवार से चीनी सेनाओं और टैंकों की वापसी की गति भी उनकी तैनाती की क्षमता को दर्शाती है। यह एक सैन्य कला है। भारतीय पक्ष ने भी अपनी सेना को पीछे किया है, मगर सबसे खराब स्थिति के लिए भी आकस्मिक योजनाएं तैयार हैं।’ उनका कहना है कि आगामी शनिवार तक दोनों देशों के सैनिक समझौते वाली सीमा से पीछे हट जायेंगे। उन्होंने कहा कि समझौता हुआ है कि डिसइंगेजमेंट तीन दिनों में पूरा हो जाएगा।

गौरतलब है कि 14 जून 2020 में लद्दाख के गलवान घाटी में दोनों देशों के सैनिकों के बीच हुईं हिसंक झड़प के बाद से सीमा पर तनाव बरकरार है, जिसे लेकर कई बार दोनों के बीच सैन्य वार्ता भी हो चुकी हैं, जिसका नतीजा है कि अब पैंगोंगत्सो झील के उत्तरी और दक्षिणी किनारों से दोनों देशों की सेनाये पीछे हट रही हैं।

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