तमिलनाडु में TASMAC के जरिए बिकने वाली शराब की गुणवत्ता को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। सरकार ने राज्य की सभी डिस्टिलरी में शराब की क्वालिटी की विस्तृत जांच करने के निर्देश दिए हैं। खास तौर पर यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि शराब में अल्कोहल की मात्रा तय मानकों के मुताबिक ही हो। यह फैसला एनरिका एंटरप्राइजेज की 11 शराब किस्मों की बिक्री पर रोक लगने और फिर जल्द ही रोक हटाए जाने के बाद उठे सवालों के बीच आया है।
11 शराब ब्रांड पर लगी रोक ने बढ़ाई चिंता
मामला तब चर्चा में आया जब FSSAI के निर्देश के बाद TASMAC ने 13 अगस्त को एनरिका एंटरप्राइजेज की 11 शराब किस्मों की बिक्री रोक दी थी। इसके अगले ही दिन संबंधित विभाग की ओर से रोक हटाने की प्रक्रिया शुरू हो गई। इस तेजी से हुए बदलाव के बाद शराब उपभोक्ताओं और TASMAC कर्मचारियों के बीच सवाल उठने लगे। रिपोर्ट के मुताबिक, FSSAI ने 11 अगस्त को इन उत्पादों पर रोक लगाई थी, जिसे 14 अगस्त को तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया गया।
डिस्टिलरी से लेकर दुकानों तक होगी क्वालिटी जांच
एक वरिष्ठ TASMAC अधिकारी के मुताबिक, शराब तैयार होने के बाद डिस्टिलरी से सैंपल लिए जाते हैं और उन्हें चेन्नई के गिंडी स्थित केंद्रीय सरकारी प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा जाता है। टेस्ट रिपोर्ट के आधार पर गुणवत्ता की पुष्टि होने के बाद ही बोतलिंग और बिक्री के लिए भेजने की प्रक्रिया आगे बढ़ती है। इसके अलावा TASMAC की ओर से दुकानों से भी कुछ बोतलें रैंडम तरीके से लेकर लैब टेस्ट कराया जाता है। अब एनरिका विवाद के बाद सभी डिस्टिलरी में व्यापक जांच के निर्देश दिए गए हैं।
42.8% ABV समेत तय मानकों पर होगी नजर
अधिकारियों के अनुसार, सामान्य शराब के लिए 42.8 प्रतिशत अल्कोहल बाय वॉल्यूम (ABV) के मानक की जांच की जाती है। वहीं वाइन में ABV 12 से 15 प्रतिशत और बीयर में 5 से 8 प्रतिशत के बीच होना चाहिए। TASMAC के जरिए करीब 250 स्थानीय और दूसरे राज्यों के शराब, बीयर और वाइन ब्रांड बेचे जाते हैं। ऐसे में सभी डिस्टिलरी की जांच का दायरा काफी बड़ा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों और उपभोक्ता संगठनों ने हालांकि यह सवाल भी उठाया है कि सिर्फ अल्कोहल प्रतिशत की जांच आधुनिक फूड सेफ्टी मानकों के लिए पर्याप्त नहीं हो सकती।
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