बिहार में MLC चुनाव के नतीजों के बाद सत्ताधारी NDA और JDU के अंदर सियासी हलचल तेज हो गई है। पूर्व सांसद आनंद मोहन ने पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने JDU के खराब प्रदर्शन पर सवाल उठाते हुए कहा कि नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद से हटाने का फैसला जनता को पसंद नहीं आया। इसका असर अब चुनावी नतीजों में दिखाई दे रहा है। आनंद मोहन ने मौजूदा पार्टी नेतृत्व पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके बयानों के बाद बिहार की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है।
नीतीश कुमार को हटाना NDA को पड़ा भारी?
आनंद मोहन का कहना है कि 2025 का विधानसभा चुनाव NDA ने नीतीश कुमार के चेहरे पर लड़ा था। जनता ने उनके नेतृत्व पर भरोसा जताकर गठबंधन को समर्थन दिया था। ऐसे में मुख्यमंत्री पद से उन्हें हटाने का फैसला लोगों को नाराज कर रहा है। आनंद मोहन के मुताबिक, जनता अपनी नाराजगी चुनावों में NDA को हराकर जाहिर कर रही है। उन्होंने आरा-बक्सर MLC उपचुनाव और बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव का उदाहरण देते हुए कहा कि हालिया नतीजे गठबंधन के लिए चिंता का विषय हैं। उन्होंने दावा किया कि MLC चुनाव में NDA आठ में से पांच सीटें हार गया।
संजय झा पर साधा निशाना, नेतृत्व को बताया जिम्मेदार
JDU के प्रदर्शन पर सवाल उठाते हुए आनंद मोहन ने पार्टी के मौजूदा नेतृत्व को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार ने अपनी मेहनत और सामाजिक समीकरणों के दम पर पार्टी को मजबूत बनाया था, लेकिन आज उनकी बनाई राजनीतिक जमीन कमजोर हो रही है। आनंद मोहन ने नेतृत्व पर तंज कसते हुए उसे ‘नकली लीडर’ तक कह दिया। उन्होंने उम्मीदवारों के चयन पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि राजपूत बहुल इलाकों में एक ही जाति के दो उम्मीदवार उतारने से पार्टी को नुकसान हुआ। उन्होंने साफ कहा कि चुनावी हार की जिम्मेदारी नेतृत्व को स्वीकार करनी चाहिए।
निर्दलीय उम्मीदवारों के समर्थन से बढ़ी चर्चा
MLC चुनाव में आनंद मोहन की भूमिका भी चर्चा का विषय बनी हुई है। उन्होंने तिरहुत स्नातक और सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में निर्दलीय उम्मीदवारों का समर्थन किया था। खास बात यह रही कि दोनों उम्मीदवार चुनाव जीतने में सफल रहे। इस पर आनंद मोहन ने कहा कि यदि JDU इन सीटों पर उनकी वजह से हारी है तो इसमें वह क्या कर सकते हैं। उन्होंने यह भी नाराजगी जताई कि पार्टी ने उन्हें चुनाव प्रचार के लिए आमंत्रित तक नहीं किया। गौरतलब है कि उनकी पत्नी लवली आनंद JDU की सांसद हैं और बेटे चेतन आनंद पार्टी के विधायक हैं। इसके बावजूद पार्टी के भीतर उनकी नाराजगी खुलकर सामने आ गई है।
अनंत सिंह के समर्थन में भी दिया बड़ा बयान
आनंद मोहन ने मोकामा के विधायक अनंत सिंह का समर्थन करते हुए कहा कि उनके साथ जो कुछ हो रहा है, वह सही नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस पूरे मामले से JDU को राजनीतिक नुकसान हो सकता है। आनंद मोहन ने 2024 की राजनीतिक घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि जब नीतीश कुमार NDA में वापस आए थे, तब अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी और उनके बेटे चेतन आनंद ने RJD के खिलाफ जाकर सरकार बनाने में सहयोग किया था। ऐसे में उनके योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। अब सवाल यह है कि आनंद मोहन के इन बयानों के बाद JDU नेतृत्व क्या रुख अपनाता है और क्या पार्टी के अंदर की नाराजगी आगे और बढ़ेगी?
