लखनऊ में भारतीय जनता पार्टी की उत्तर प्रदेश इकाई के मुख्यालय पर आयोजित एक अहम प्रेस वार्ता के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह उस वक्त असहज स्थिति में आ गए जब उनसे दिवंगत समाजवादी पार्टी संस्थापक मुलायम सिंह यादव को मरणोपरांत पद्म विभूषण दिए जाने को लेकर सीधा सवाल पूछ लिया गया। प्रेस वार्ता के अंतिम क्षणों में जब राजनाथ सिंह जाने के लिए उठने वाले थे, तभी एक पत्रकार ने तीखा सवाल दागा कि “कारसेवकों पर गोली चलवाने वाले को आपने पद्म पुरस्कार क्यों दिया?” इस अप्रत्याशित और कड़े सवाल को सुनकर रक्षा मंत्री ने तुरंत अपनी सीट पर दोबारा बैठने का फैसला किया और अपने बगल में बैठे यूपी बीजेपी प्रमुख पंकज चौधरी से रुकने का इशारा करते हुए पूरे सवाल को ध्यान से सुना।
राजनाथ सिंह का सधा हुआ जवाब और कांग्रेस पर राजनीतिक वार
पत्रकार के सवाल का सामना करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने स्थिति को संभालते हुए बहुत नपेंगे-तुले अंदाज में प्रतिक्रिया दी। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “चलिए देखते हैं, इसके कई कारण थे,” और इसके साथ ही उन्होंने मुस्कुराकर सभी का धन्यवाद करते हुए प्रेस वार्ता समाप्त कर दी। दरअसल, इस प्रेस वार्ता में मुख्य रूप से राजनाथ सिंह ने साल 2004 से 2014 के बीच समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के सियासी संबंधों पर तीखा हमला बोला था। उन्होंने कांग्रेस के कार्यकाल के दौरान तीन बड़े और अक्षम्य राजनीतिक अपराधों का जिक्र किया, जिसमें साल 1975 की इमरजेंसी, साल 1984 का सिख विरोधी नरसंहार और साल 1990 में अयोध्या में रामभक्तों पर गोली चलवाने वाली तत्कालीन सपा सरकार को समर्थन देकर कांग्रेस द्वारा यूपीए सरकार बचाने का मामला शामिल था।
साल 2008 में परमाणु समझौते के वक्त बचाई थी यूपीए सरकार
प्रेस वार्ता के दौरान जिन राजनीतिक समीकरणों का जिक्र किया गया, उनकी जड़ें साल 2008 के उस दौर में थीं जब देश में भारत-अमेरिका नागरिक परमाणु समझौते को लेकर राजनीतिक भूचाल आया हुआ था। वाम दलों द्वारा समर्थन वापस ले लिए जाने के बाद कांग्रेस नीत यूपीए सरकार अल्पमत में आ गई थी और संकट में घिर गई थी। उस नाजुक मोड़ पर 22 जुलाई 2008 को मुलायम सिंह यादव की समाजवादी पार्टी ने आगे आकर यूपीए को संकट से उबारा और मनमोहन सिंह सरकार के पक्ष में खड़े होकर उसे गिरने से बचा लिया। उस वक्त संसद में हुए फ्लोर टेस्ट में सरकार के समर्थन में 275 वोट पड़े थे। बाद में मीडिया से बातचीत में मुलायम सिंह यादव ने सफाई देते हुए कहा था कि देश के तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने उन्हें आश्वस्त किया था कि यह परमाणु समझौता पूरी तरह देशहित में है, इसलिए उनकी पार्टी ने राष्ट्रीय हित को सर्वोपरि रखते हुए सरकार का समर्थन किया था।
साल 2023 में मिला था देश का दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान
राजनीतिक विरोध और वैचारिक मतभेदों से परे हटकर केंद्र सरकार ने साल 2023 में देश के दिग्गज समाजवादी नेता मुलायम सिंह यादव को उनके लंबे सार्वजनिक जीवन और राष्ट्र निर्माण में दिए गए अतुलनीय योगदान के लिए देश के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान ‘पद्म विभूषण’ से मरणोपरांत सम्मानित किया था। दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक भव्य और गरिमामयी समारोह के दौरान मुलायम सिंह यादव के बेटे और समाजवादी पार्टी के वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों यह प्रतिष्ठित पुरस्कार गर्व के साथ ग्रहण किया था। हालांकि, राजनीतिक मंचों पर आज भी इस बात को लेकर बहस छिड़ जाती है कि वैचारिक धुरविरोधी दलों के नेताओं को ऐसे बड़े सम्मान मिलने के पीछे की राजनीतिक और प्रशासनिक वजहें क्या रही हैं।
