महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना (UBT) को बड़ा झटका लगा है। पार्टी के छह सांसदों ने नेतृत्व से दूरी बनाते हुए अलग रास्ता चुन लिया है। सामने आई जानकारी के मुताबिक सांसदों ने अपने प्रस्ताव में दावा किया है कि उन्हें आशंका थी कि भविष्य में शिवसेना (UBT) का कांग्रेस में विलय कराया जा सकता है। सांसदों का कहना है कि शिवसेना की स्थापना बालासाहेब ठाकरे ने अपनी अलग विचारधारा और पहचान के साथ की थी, इसलिए कांग्रेस में विलय का कोई भी प्रयास पार्टी के मूल सिद्धांतों के खिलाफ होगा। इसी वजह से उनका पार्टी नेतृत्व पर भरोसा कमजोर पड़ गया और उन्होंने अलग होने का फैसला लिया।
संजय राउत के बयान ने बढ़ाई शंकाएं
बागी सांसदों के प्रस्ताव में संजय राउत के एक बयान का भी जिक्र किया गया है। सांसदों का कहना है कि जब संजय राउत ने तृणमूल कांग्रेस को कांग्रेस में विलय की सलाह दी थी, तभी से उनके मन में यह आशंका पैदा हो गई थी कि कहीं भविष्य में शिवसेना (UBT) के साथ भी ऐसा कदम न उठाया जाए। उनका मानना था कि यदि पार्टी की पहचान और विचारधारा से समझौता किया गया तो कार्यकर्ताओं और नेताओं की वर्षों की मेहनत पर असर पड़ेगा। इसी कारण सांसदों ने नेतृत्व के फैसलों पर भरोसा खोने की बात अपने प्रस्ताव में दर्ज की है।
अलग गुट नहीं, सीधे शिंदे की शिवसेना में जाने का फैसला
इस पूरे घटनाक्रम की सबसे अहम बात यह है कि बागी सांसदों ने खुद को अलग संसदीय समूह घोषित करने का दावा नहीं किया है। प्रस्ताव के अनुसार उन्होंने सीधे मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने का निर्णय लिया है। यानी उन्होंने नया गुट बनाने के बजाय शिंदे गुट के साथ जाने का रास्ता चुना है। इससे महाराष्ट्र की राजनीति में नई हलचल तेज हो गई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस फैसले से उद्धव ठाकरे की पार्टी की संसदीय ताकत पर असर पड़ सकता है और आने वाले समय में संगठन के भीतर भी बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
आगे क्या होगा, इस पर सबकी नजर
छह सांसदों के इस फैसले के बाद अब सभी की निगाहें उद्धव ठाकरे और शिवसेना (UBT) के अगले कदम पर टिकी हैं। पार्टी की ओर से अभी तक इन आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं राजनीतिक गलियारों में इस घटनाक्रम को महाराष्ट्र की राजनीति का बड़ा मोड़ माना जा रहा है। यदि आने वाले दिनों में और नेता या सांसद भी इसी राह पर चलते हैं तो इसका असर राज्य की राजनीति के साथ-साथ विपक्षी गठबंधन की रणनीति पर भी पड़ सकता है। फिलहाल कांग्रेस में संभावित विलय की आशंका और संजय राउत के बयान को लेकर शुरू हुई यह बहस राजनीतिक हलकों में चर्चा का बड़ा विषय बनी हुई है।
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