देश में लंबे समय से प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक का मुद्दा गरमाया हुआ है। लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़े इस संवेदनशील मसले पर अचानक उस वक्त नया मोड़ आ गया, जब गुरुवार की देर रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक वीडियो संदेश सामने आया। अमूमन पीएम मोदी रात 8 बजे देश को संबोधित करने के लिए जाने जाते हैं, लेकिन इस बार आधी रात के आसपास जारी इस वीडियो ने हर किसी को हैरान कर दिया। पीएम ने साफ किया कि सरकार पेपर लीक के मामलों से निपटने के लिए बेहद गंभीर है और जल्द ही इसके खिलाफ एक सख्त ड्राफ्ट (मसौदा) तैयार कर लिया गया है, जिसे कैबिनेट की बैठक में पेश किया जाएगा।
‘अरे सर आ गए आप!’: संजय सिंह ने तंज कसते हुए उठाए कई तीखे सवाल
प्रधानमंत्री के इस देर रात वाले संबोधन पर आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय सिंह ने तुरंत मोर्चा खोल दिया। सोशल मीडिया पर तीखा हमला बोलते हुए संजय सिंह ने कहा कि पीएम का टाइम तो अमूमन रात 8 बजे का होता है, लेकिन वे आधी रात को प्रकट हुए हैं। उन्होंने पीएम मोदी के शब्दों का मजाक उड़ाते हुए कहा कि ऐसा लगता है सरकार को असल ‘मसौदे’ की जगह कोई ‘मुसद्दा’ मिल गया है। आप नेता का सीधा आरोप था कि जब-जब देश में युवाओं का गुस्सा बढ़ता है, सरकार ऐसे ही बड़े-बड़े दावे और वीडियो जारी करके जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश करती है।
Fast-Track Court को बताया ‘नौटंकी’, CBI की कार्यशैली पर खड़े किए गंभीर निशान
संजय सिंह का गुस्सा यहीं शांत नहीं हुआ। उन्होंने सरकार द्वारा प्रस्तावित ‘फास्ट ट्रैक कोर्ट’ की व्यवस्था को महज एक छलावा बताया। उनका कहना था कि जब जांच एजेंसियां ही ढिलाई बरतेंगी, तो अदालतें क्या करेंगी? संजय सिंह ने दावा किया कि पेपर लीक मामले के मुख्य संदिग्ध संजीव मुखिया के खिलाफ सीबीआई ने कोर्ट में कहा कि उनके पास कोई पुख्ता सबूत नहीं है। इतना ही नहीं, उन्होंने आरोप लगाया कि 2024 के पेपर लीक मामलों में सीबीआई ने 90 दिनों के भीतर चार्जशीट तक दाखिल नहीं की, जिसकी वजह से धांधली करने वाले कई आरोपी आसानी से छूट गए।
जानिए पीएम मोदी ने अपने रात के संदेश में छात्रों से क्या वादे किए?
दूसरी तरफ, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने वीडियो संदेश में युवाओं और उनके अभिभावकों के दर्द को स्वीकार करते हुए ढांढस बंधाया। पीएम ने कहा कि लाखों छात्रों की पीड़ा को वे भली-भांति समझते हैं और पिछले ढाई महीनों में इस दिशा में कई ठोस कदम उठाए गए हैं। उन्होंने बताया कि दोषियों को सलाखों के पीछे भेजा गया है और सरकार का प्राथमिक लक्ष्य छात्रों का एक साल बर्बाद होने से बचाना था। पीएम के मुताबिक, करीब 22 लाख छात्रों के भविष्य को देखते हुए कम से कम समय में दोबारा परीक्षाएं कराई गईं और उनके परिणाम भी घोषित किए गए। अब फास्ट-ट्रैक कोर्ट और सख्त सजा के प्रावधान वाले नए कानून के मसौदे को कैबिनेट मंजूरी के लिए भेजा जा रहा है।
