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सपने में भी नहीं… बारामती उपचुनाव पर अजित दादा को याद कर भावुक हुए रोहित पवार

बारामती विधानसभा उपचुनाव 2026 की घोषणा के बाद रोहित पवार ने अजित पवार को याद करते हुए भावुक पोस्ट किया। जानिए बारामती सीट पर उपचुनाव क्यों हो रहा है, चुनाव की तारीखें क्या हैं और महाराष्ट्र की राजनीति में इसका क्या असर पड़ सकता है।

रोहित पवार

महाराष्ट्र की राजनीति में बेहद अहम मानी जाने वाली बारामती विधानसभा सीट एक बार फिर सुर्खियों में है। लेकिन इस बार वजह चुनावी मुकाबला नहीं बल्कि एक ऐसा उपचुनाव है जिसकी कल्पना भी शायद ही किसी ने की होगी। दरअसल महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री रहे Ajit Pawar के निधन के बाद यह सीट खाली हो गई थी, जिसके चलते चुनाव आयोग को यहां उपचुनाव कराना पड़ रहा है। इस बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के नेता Rohit Pawar ने अजित पवार को याद करते हुए सोशल मीडिया पर एक भावुक संदेश साझा किया है। उनके इस पोस्ट ने न सिर्फ पार्टी कार्यकर्ताओं बल्कि पूरे राजनीतिक गलियारे को भावुक कर दिया है। रोहित पवार ने अपने संदेश में कहा कि बारामती की राजनीति हमेशा जीत के अंतर की चर्चा के लिए जानी जाती थी, लेकिन शायद ही किसी ने कभी सोचा होगा कि यहां उपचुनाव की नौबत आएगी। उनके मुताबिक यह स्थिति बेहद दुखद है क्योंकि अजित पवार जैसे बड़े नेता के अचानक चले जाने से पूरे क्षेत्र में एक खालीपन महसूस किया जा रहा है।

रोहित पवार का भावुक पोस्ट—‘हकीकत कल्पना से ज्यादा डरावनी’

रोहित पवार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने पोस्ट में बारामती की राजनीतिक विरासत का जिक्र करते हुए कहा कि यह सीट हमेशा से स्थिर और मजबूत नेतृत्व की पहचान रही है। उन्होंने लिखा कि बारामती विधानसभा क्षेत्र में अक्सर केवल जीत के अंतर की चर्चा होती थी, क्योंकि यहां से जीत लगभग तय मानी जाती थी। लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल गए हैं। उन्होंने लिखा कि “कभी किसी ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि बारामती में उपचुनाव कराना पड़ेगा, लेकिन दुर्भाग्य से अजित दादा हमें छोड़कर चले गए हैं।” रोहित पवार ने आगे लिखा कि कई बार वास्तविकता कल्पना से भी ज्यादा भयावह होती है। उनके इस बयान को राजनीतिक विश्लेषक केवल एक भावनात्मक प्रतिक्रिया नहीं बल्कि आने वाले चुनावों के लिए भावनात्मक माहौल बनाने की रणनीति के रूप में भी देख रहे हैं। अजित पवार को महाराष्ट्र की राजनीति में एक मजबूत प्रशासक और प्रभावशाली नेता माना जाता था, जिनका बारामती और आसपास के इलाकों में काफी मजबूत जनाधार था। ऐसे में उनके निधन के बाद होने वाला यह उपचुनाव निश्चित रूप से बेहद दिलचस्प और संवेदनशील होने वाला है।

चुनाव आयोग ने घोषित किया उपचुनाव का पूरा कार्यक्रम

इस बीच Election Commission of India ने महाराष्ट्र की दो विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है। इनमें अहमदनगर जिले की राहुरी सीट और पुणे जिले की बारामती सीट शामिल हैं। चुनाव आयोग के मुताबिक इन दोनों सीटों पर 23 अप्रैल को मतदान कराया जाएगा, जबकि मतगणना 4 मई को होगी। राहुरी सीट भाजपा के विधायक रहे शिवाजी कर्डीले के निधन के कारण खाली हुई है, जबकि बारामती सीट अजित पवार के निधन के बाद रिक्त हुई। चुनाव आयोग ने उपचुनाव के साथ ही आचार संहिता भी लागू कर दी है, जिसके बाद राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है। बारामती सीट को खासतौर पर इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यह लंबे समय से पवार परिवार की राजनीतिक ताकत का केंद्र रही है। ऐसे में इस सीट पर होने वाला उपचुनाव केवल एक स्थानीय चुनाव नहीं बल्कि पूरे राज्य की राजनीति के लिए संकेत देने वाला माना जा रहा है।

बारामती का चुनाव क्यों माना जा रहा है बेहद अहम

बारामती की पहचान महाराष्ट्र की राजनीति में एक मजबूत राजनीतिक गढ़ के रूप में रही है। यह क्षेत्र लंबे समय से पवार परिवार के प्रभाव में रहा है और यहां के चुनावी नतीजे अक्सर राज्य की राजनीतिक दिशा तय करने वाले माने जाते हैं। अजित पवार के निधन के बाद यह पहली बार है जब इस सीट पर उपचुनाव होने जा रहा है, इसलिए सभी प्रमुख राजनीतिक दल इस चुनाव को बेहद गंभीरता से ले रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह उपचुनाव केवल एक सीट जीतने का मामला नहीं बल्कि सहानुभूति, संगठन और राजनीतिक रणनीति की बड़ी परीक्षा भी होगा। एक ओर पवार परिवार की विरासत और भावनात्मक जुड़ाव का मुद्दा रहेगा, वहीं दूसरी ओर विपक्षी दल इसे अपने प्रभाव को बढ़ाने का अवसर मान सकते हैं। यही वजह है कि बारामती का यह चुनाव आने वाले समय में महाराष्ट्र की राजनीति की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है। फिलहाल चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही राजनीतिक माहौल गर्म हो चुका है और आने वाले हफ्तों में यहां चुनावी गतिविधियां तेज होने की पूरी संभावना है।

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