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TCS केस में आरोपी निदा खान को मिली राहत, लेकिन जमानत के आदेश में कोर्ट ने क्यों लिया भगवान कृष्ण का नाम?

TCS नासिक केस में आरोपी निदा खान को गर्भावस्था के आधार पर जमानत मिली। अदालत ने आदेश में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उल्लेख किया। जानिए पूरा मामला और कोर्ट की अहम टिप्पणी।

निदा खान

महाराष्ट्र के नासिक में चल रहे चर्चित TCS केस में अदालत ने आरोपी पूर्व कर्मचारी निदा खान को जमानत दे दी है। यह फैसला सामने आने के बाद मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। अदालत ने जमानत देते समय आरोपी की गर्भावस्था को महत्वपूर्ण आधार माना। न्यायालय का कहना था कि एक गर्भवती महिला को जेल में बच्चे को जन्म देने की स्थिति से बचाने पर भी विचार किया जाना चाहिए। इसी वजह से अदालत ने कुछ शर्तों के साथ जमानत मंजूर की। अदालत के इस फैसले की कानूनी और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा हो रही है, क्योंकि आदेश में न्यायाधीश ने एक ऐतिहासिक और धार्मिक संदर्भ का भी उल्लेख किया है।

जमानत आदेश में भगवान कृष्ण के जन्म का जिक्र

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश केजी जोशी ने अपने आदेश में कहा कि किसी भी महिला के लिए जेल में प्रसव की परिस्थितियां मानसिक और सामाजिक रूप से कठिन हो सकती हैं। न्यायालय ने यह भी उल्लेख किया कि इतिहास और धार्मिक कथाओं में भी जेल में जन्म लेने की पीड़ा का वर्णन मिलता है। इसी संदर्भ में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की कथा का उल्लेख करते हुए अदालत ने कहा कि नवजात शिशु के हितों और मानवीय पहलुओं को ध्यान में रखना आवश्यक है। न्यायालय ने माना कि गर्भ में पल रहे बच्चे का भी सुरक्षित और बेहतर वातावरण में जन्म लेने का अधिकार है। इसी आधार पर अदालत ने आरोपी को 75 हजार रुपये के निजी मुचलके और समान राशि के एक जमानतदार पर रिहा करने का आदेश दिया।

क्या हैं निदा खान पर लगे आरोप?

यह मामला टीसीएस की नासिक इकाई से जुड़ा हुआ है, जहां महिला कर्मचारियों के कथित उत्पीड़न, धार्मिक दबाव और धर्म परिवर्तन के प्रयासों से संबंधित शिकायतें दर्ज की गई थीं। जांच एजेंसियों के अनुसार, निदा खान पर आरोप है कि उन्होंने शिकायतकर्ता को धार्मिक साहित्य उपलब्ध कराया, कुछ धार्मिक ऐप मोबाइल में इंस्टॉल करवाए और धार्मिक गतिविधियों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। इसके अलावा कई अन्य आरोपों की भी जांच की जा रही है। शिकायतकर्ता अनुसूचित जाति समुदाय से संबंधित होने के कारण मामले में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराएं भी लगाई गई हैं। हालांकि, आरोपी पक्ष इन आरोपों को खारिज करता रहा है और उनका कहना है कि उन्हें गलत तरीके से मामले में शामिल किया गया है।

जांच पूरी, अब अदालत में होगी कानूनी लड़ाई

अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा कि मामले की जांच काफी हद तक पूरी हो चुकी है और आरोप पत्र भी दाखिल किया जा चुका है। ऐसे में आरोपी को लगातार न्यायिक हिरासत में रखना जरूरी नहीं माना गया। वहीं सरकारी पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए दावा किया कि जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं, जिनकी गंभीरता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। दूसरी ओर बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि निदा खान पहले टीसीएस में कार्यरत थीं और उन्हें झूठे आरोपों में फंसाया गया है। फिलहाल अदालत ने जमानत दे दी है, लेकिन मामले की सुनवाई जारी रहेगी। अब सभी की नजर आगे की कानूनी प्रक्रिया पर है, जहां सबूतों और गवाहों के आधार पर अंतिम फैसला होगा।

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