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चीतों के बीच रात बिताएंगी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु: कूनो नेशनल पार्क में जानिए पूरा कार्यक्रम

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु मध्य प्रदेश दौरे के दौरान कूनो नेशनल पार्क में रात्रि विश्राम करेंगी। वह प्रोजेक्ट चीता की समीक्षा करेंगी, चीता सफारी करेंगी और वन अधिकारियों व चीता मित्रों से मुलाकात करेंगी।

राष्ट्रपति Droupadi Murmu

राष्ट्रपति Droupadi Murmu अपने मध्य प्रदेश दौरे के दौरान श्योपुर स्थित Kuno National Park में रात्रि विश्राम करेंगी। कूनो में राष्ट्रपति का यह दौरा कई मायनों में खास माना जा रहा है, क्योंकि यहां चल रहे ‘प्रोजेक्ट चीता’ को देश की सबसे महत्वपूर्ण वन्यजीव संरक्षण योजनाओं में गिना जाता है। रविवार को जबलपुर में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम में हिस्सा लेने के बाद राष्ट्रपति ग्वालियर के रास्ते श्योपुर पहुंचेंगी। कूनो पहुंचने के बाद वे अधिकारियों के साथ बैठक करेंगी और चीता परियोजना की मौजूदा स्थिति की जानकारी लेंगी।

 चीतों की देखरेख और संरक्षण कार्यों की होगी समीक्षा

राष्ट्रपति अपने दौरे के दौरान कूनो में बनाए गए चीतों के बाड़ों और उनकी निगरानी व्यवस्था का निरीक्षण करेंगी। अधिकारियों की ओर से उन्हें बताया जाएगा कि विदेशों से लाए गए चीतों के स्वास्थ्य, भोजन और सुरक्षा के लिए क्या व्यवस्थाएं की गई हैं। इसके अलावा, प्रोजेक्ट शुरू होने के बाद अब तक हुए विकास और सामने आई चुनौतियों पर भी चर्चा होगी। बताया जा रहा है कि राष्ट्रपति विशेष रूप से यह जानना चाहती हैं कि चीतों के नए वातावरण में ढलने और उनकी संख्या बढ़ाने के लिए किस तरह के प्रयास किए जा रहे हैं।

चीता सफारी करेंगी, स्थानीय टीम से मिलेंगी

22 जून की सुबह राष्ट्रपति कूनो नेशनल पार्क में चीता सफारी करेंगी। इस दौरान उन्हें खुले जंगल में रह रहे चीतों की गतिविधियों को करीब से देखने का अवसर मिलेगा। इसके साथ ही वे ‘चीता मित्रों’, वन विभाग के अधिकारियों, मॉनिटरिंग टीम और स्थानीय गाइडों से भी मुलाकात करेंगी। ये सभी लोग चीतों की सुरक्षा और उनकी निगरानी में अहम भूमिका निभा रहे हैं। राष्ट्रपति उनसे उनके अनुभव और चुनौतियों के बारे में भी जानकारी लेंगी।

 देश की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में शामिल है प्रोजेक्ट चीता

भारत में चीतों की वापसी के उद्देश्य से ‘प्रोजेक्ट चीता’ की शुरुआत सितंबर 2022 में हुई थी। इस परियोजना के तहत सबसे पहले नामीबिया से आठ चीते कूनो लाए गए थे। इसके बाद दक्षिण अफ्रीका और अन्य देशों से भी चीते यहां लाए गए। मौजूदा समय में कूनो में चीतों की संख्या बढ़कर 49 हो चुकी है, जिनमें कई शावकों का जन्म भारत में हुआ है। विशेषज्ञ इस परियोजना को वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि मान रहे हैं। राष्ट्रपति का यह दौरा इस परियोजना को और मजबूती देने के साथ-साथ वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभा सकता है।

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