हाल ही में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के आगरा के विजयनगर स्थित पैतृक आवास पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा जोरदार विरोध प्रदर्शन किया गया था। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने आवास के बाहर आपत्तिजनक नारे लगाए और घर के बाहर कालिख पोतते हुए अभद्र शब्दों का इस्तेमाल किया था। इस घटना के वक्त घर के अंदर मुख्य चुनाव आयुक्त के बुजुर्ग माता-पिता अकेले मौजूद थे। इस शर्मनाक हरकत के बाद से स्थानीय लोगों और परिजनों में भारी रोष व्याप्त है, जिसके चलते अब इस पूरे मामले पर परिवार की प्रतिक्रिया सामने आई है।
माता-पिता ने जताया गहरा दुख, पिता ने एसआईआर प्रक्रिया को बताया सही
इस पूरी घटना पर मुख्य चुनाव आयुक्त के पिता सुबोध गुप्ता और माता सत्यवती देवी ने गहरा दुख व्यक्त किया है। सुबोध गुप्ता ने कहा कि ज्ञानेश कुमार द्वारा चलाई जा रही एसआईआर (SIR) प्रक्रिया को लेकर विपक्षी पार्टियां बेवजह सवाल उठा रही हैं, जबकि ऐसी पारदर्शी प्रक्रियाएं इसलिए जरूरी हैं ताकि हर नागरिक को उसका वोटिंग अधिकार मिल सके और पूरी सच्चाई जनता के सामने आ सके। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब दक्षिण भारत के राज्यों में चुनाव होते हैं और यही दल वहां जीत दर्ज करते हैं, तब किसी को कोई आपत्ति नहीं होती, लेकिन यहाँ असंतोष जताया जा रहा है। माता सत्यवती देवी ने कहा कि जिन्होंने उनके घर पर इस तरह का अमर्यादित माहौल बनाया, भगवान उनकी बुद्धि का शुद्धिकरण करें।
वैश्य समाज ने किया गंगाजल से घर का शुद्धिकरण
इस घटना के विरोध में अखिल भारत माथुर वैश्य समाज की महिलाओं और स्थानीय नागरिकों ने कड़ा आक्रोश जताया है। महिलाओं ने विजयनगर स्थित राधा कृष्ण मंदिर से एक विरोध मार्च निकाला और बड़ी संख्या में लोग सीईसी के पैतृक आवास पर पहुंचे। इसके बाद पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करके विधि-विधान से घर का शुद्धिकरण किया गया और शंखनाद के साथ भजन-कीर्तन हुए। समाज के लोगों का कहना है कि यदि कांग्रेस कार्यकर्ताओं को मुख्य चुनाव आयुक्त की किसी नीति या कार्यशैली से कोई असंतोष या आपत्ति है, तो वे दिल्ली स्थित उनके कार्यालय या आवास पर जाकर अपना विरोध दर्ज करा सकते हैं। बुजुर्ग माता-पिता के निजी घर पर इस तरह का उपद्रव करना पूरी तरह से अनुचित और निंदनीय है।
पुलिस कार्रवाई और आगे की स्थिति
इस मामले के तूल पकड़ने और वैश्य समाज के विरोध के बाद स्थानीय पुलिस हरकत में आई थी। पुलिस ने फौरन कार्रवाई करते हुए आवास पर प्रदर्शन और बदसलूकी करने वाले छह कांग्रेस कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था, हालांकि बाद में उन्हें अदालत से जमानत मिल गई। इसके बावजूद इस घटना को लेकर राजनीतिक गलियारों और स्थानीय स्तर पर गहमागहमी बनी हुई है। चुनाव आयोग के शीर्ष पद पर बैठे व्यक्ति के परिवार को इस तरह के राजनीतिक विरोध का निशाना बनाए जाने की घटना ने समाज के विभिन्न वर्गों को झकझोर कर रख दिया है, और लोग ऐसी राजनीतिक संस्कृति की कड़ी निंदा कर रहे हैं।
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