आईवियर रिटेल कंपनी Lenskart अचानक चर्चा के केंद्र में आ गई, जब उसके ड्रेस कोड से जुड़ा एक दस्तावेज सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इस दस्तावेज में कर्मचारियों के पहनावे को लेकर कुछ ऐसे निर्देश बताए गए, जिन्हें लेकर लोगों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए। खास तौर पर बिंदी, तिलक और कलावा जैसे धार्मिक प्रतीकों पर कथित रोक की बात ने विवाद को हवा दी। वहीं दूसरी ओर हिजाब और पगड़ी की अनुमति का जिक्र होने से कई यूजर्स ने इसे असमान व्यवहार बताया। देखते ही देखते मामला सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगा और कंपनी पर जवाब देने का दबाव बढ़ गया।
कंपनी की सफाई—‘हर धर्म और पहचान का सम्मान’
विवाद बढ़ने के बाद Lenskart ने अपनी स्थिति स्पष्ट की। कंपनी ने कहा कि वह भारत में बनी और यहीं काम करने वाली संस्था है, जहां विभिन्न पृष्ठभूमि के लोग एक साथ काम करते हैं। बयान में कहा गया कि उनके स्टोर्स में कर्मचारी अपनी आस्था और परंपराओं के साथ काम पर आते हैं और किसी से भी उसकी पहचान छोड़ने को नहीं कहा जाता। कंपनी ने साफ किया कि बिंदी, तिलक, सिंदूर, कड़ा, पगड़ी, हिजाब जैसे सभी सांस्कृतिक और धार्मिक प्रतीकों का सम्मान किया जाता है। साथ ही यह भी माना गया कि यदि किसी पुराने दस्तावेज या संदेश से गलतफहमी पैदा हुई है, तो उसके लिए खेद है।
We have heard you. Clearly and openly. Over the past few days, our community and customers have spoken – and we have listened.
Today, we are standardizing our In-Store Style Guide and sharing it publicly and transparently: https://t.co/lC8KlLLUZm
These guidelines explicitly and…
— lenskart (@Lenskart_com) April 18, 2026
पुराने नियमों पर उठे सवाल
वायरल हुए ड्रेस कोड में कुछ ऐसे निर्देश बताए गए थे, जिन पर अब सवाल उठ रहे हैं। इसमें कथित तौर पर कहा गया था कि कुछ धार्मिक प्रतीकों को सीमित या हटाने की बात कही गई थी, जबकि कुछ अन्य प्रतीकों को अनुमति दी गई थी। इस असमानता को लेकर पूर्व कर्मचारियों ने भी अपनी बात रखी। कुछ लोगों ने दावा किया कि धार्मिक पहचान से जुड़े नियमों के कारण उन्हें ऑडिट में नुकसान हुआ या शिकायतों का संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इन आरोपों के सामने आने के बाद मामला और संवेदनशील हो गया और कंपनी की आंतरिक नीतियों पर बहस तेज हो गई।
सीईओ का बयान और नीति में बदलाव
कंपनी के संस्थापक और सीईओ Peyush Bansal ने इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जो दस्तावेज सामने आया, वह एक पुरानी ट्रेनिंग सामग्री थी, न कि मौजूदा आधिकारिक नीति। उन्होंने माना कि उसमें कुछ गलत शब्द शामिल थे, जिन्हें पहले ही हटा दिया गया था। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इस गलती को समय रहते पहचान नहीं पाना एक कमी रही। बढ़ते विरोध के बीच कंपनी ने विवादित ड्रेस कोड को पूरी तरह खत्म कर दिया और नई गाइडलाइन लागू की, जिसमें सभी धर्मों और परंपराओं के प्रतीकों को समान रूप से स्वीकार करने की बात कही गई है। कंपनी ने यह भी भरोसा दिलाया कि आगे ऐसी स्थिति न बने, इसके लिए प्रक्रियाओं की समीक्षा जारी रहेगी।
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