लखनऊ के अलीगंज अग्निकांड मामले में लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल उठाए हैं। एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने जांच के बाद तत्कालीन विहित प्राधिकारी, जोनल अधिकारियों और अभियंताओं सहित कुल 18 अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति शासन को भेज दी है। यह मामला अवैध निर्माण और मानचित्र उल्लंघन से जुड़ा हुआ है, जिसे लंबे समय तक नजरअंदाज किए जाने का आरोप है। रिपोर्ट सामने आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेज हो गई है और पूरे मामले की जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया आगे बढ़ गई है।
फाइलों की जांच में सामने आई लापरवाही
जांच के दौरान एलडीए उपाध्यक्ष ने संबंधित प्रकरण से जुड़ी सभी फाइलों की विस्तृत समीक्षा की। इसमें यह पाया गया कि अलीगंज सेक्टर-डी स्थित भूखंड पर आवंटन, रजिस्ट्री और भवन निर्माण की प्रक्रिया के दौरान कई स्तरों पर गंभीर चूक हुई। रिपोर्ट के अनुसार जिस भवन का नक्शा केवल एकल आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत था, वहां बाद में बहुमंजिला व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होने लगीं। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने न तो समय पर कार्रवाई की और न ही प्रभावी प्रवर्तन किया। नतीजतन मानचित्र उल्लंघन और अवैध निर्माण वर्षों तक जारी रहा, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो गए।
ध्वस्तीकरण आदेश रद्द होने पर उठे सवाल
जांच रिपोर्ट में सबसे गंभीर बिंदु तत्कालीन विहित प्राधिकारी की भूमिका को लेकर सामने आया है। वर्ष 2016 में भवन के खिलाफ ध्वस्तीकरण आदेश जारी किया गया था, लेकिन बाद में निर्माणकर्ता के आवेदन पर इस आदेश को समाप्त कर दिया गया। इसके बाद यह सवाल उठाया गया कि आदेश रद्द करने के बाद भवन की स्थिति और मानचित्र अनुपालन की दोबारा जांच क्यों नहीं की गई। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि निगरानी की कमी और प्रशासनिक उदासीनता के कारण अवैध निर्माण को बढ़ावा मिला, जिससे भविष्य में बड़े हादसे की आशंका भी बनी रही।
18 अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध
एलडीए उपाध्यक्ष ने इस पूरे मामले में 18 अधिकारियों की भूमिका को संदिग्ध और लापरवाहीपूर्ण मानते हुए कार्रवाई की सिफारिश की है। इनमें तत्कालीन विहित प्राधिकारी, पांच जोनल अधिकारी, छह सहायक अभियंता और छह अवर अभियंता शामिल हैं। सभी के खिलाफ विस्तृत रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। अब अंतिम निर्णय राज्य सरकार द्वारा लिया जाएगा। इस कार्रवाई के बाद एलडीए में भी प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही तय करने की चर्चा तेज हो गई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े प्रशासनिक फैसले सामने आ सकते हैं।
