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शादी से पहले लड़कों का डोप और मेडिकल टेस्ट अनिवार्य! क्या देश की बेटियों के लिए ये नया कानून आएगा?

AAP सांसद मालविंदर सिंह कंग ने लोकसभा में मांग की कि शादी से पहले लड़कों का डोप और मेडिकल टेस्ट अनिवार्य किया जाए। जानें क्यों यह कदम महिलाओं और परिवारों की सुरक्षा के लिए जरूरी माना जा रहा है।

शादी

लोकसभा में शुक्रवार को आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद मालविंदर सिंह कंग ने एक ऐसा मुद्दा उठाया जिसने संसद में चर्चा का माहौल बदल दिया। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि शादी से पहले लड़कों का डोप टेस्ट और मेडिकल जांच अनिवार्य किया जाए। कंग का कहना था कि आज के समाज में तलाक और घरेलू हिंसा के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। इसके चलते नए रिश्तों में लड़कों के स्वास्थ्य और मानसिक स्थिति पर भी उतनी जांच-पड़ताल होनी चाहिए जितनी लड़कियों पर की जाती है। उन्होंने कहा, “जब नया रिश्ता जुड़ता है तो लड़की के बारे में हर तरह की जानकारी ली जाती है, लेकिन लड़कों के मामले में लोगों की आंखें बंद रहती हैं। अब समय आ गया है कि इस दोहरे रवैये को खत्म किया जाए।”

 दूल्हों की जाँच क्यों जरूरी?

कंग ने अपनी बात को और स्पष्ट करते हुए कहा कि शादी से पहले लड़कों के नशे की आदत, गंभीर बीमारियाँ या आपराधिक प्रवृत्तियाँ अक्सर छिपी रहती हैं। शादी के बाद इन चीज़ों का पता चलता है और परिवारों को भारी नुकसान होता है। उन्होंने जोर दिया कि लड़कों के मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट और डोप टेस्ट को अनिवार्य बनाने से न सिर्फ महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि घरों में टूट-फूट और तलाक के मामलों में कमी आएगी। कंग ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि यह छोटे सुधार के समान है, लेकिन इसके असर की महत्ता बहुत बड़ी है। उनका कहना था कि “छोटा सा सुधार हमारी महिलाओं और शादी की पवित्रता के लिए एक ढाल साबित होगा।”

समाज और कानून पर असर

सांसद कंग ने यह भी कहा कि यह मांग सिर्फ पंजाब तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे भारत में लागू होने की जरूरत है। उन्होंने संसद में कहा कि तलाक और घरेलू हिंसा अब पूरे देश में गंभीर समस्या बन चुकी है। उनका सुझाव है कि शादी का सर्टिफिकेट जारी करने से पहले लड़कों के डोप टेस्ट और मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट अनिवार्य किया जाना चाहिए। इससे दुल्हन की सुरक्षा के साथ-साथ परिवारों की स्थिरता भी बनी रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह कदम लागू होता है तो यह शादी से जुड़े कई सामाजिक और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को कम कर सकता है।

 महिलाओं की सुरक्षा और समाज में बदलाव

कंग ने कहा कि यह पहल महिलाओं को सुरक्षित जीवन देने और परिवारों को मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि “अब और चुपचाप तकलीफ़ सहने की जरूरत नहीं है और टूटे हुए घरों को देखने की जरूरत नहीं है।” उनके अनुसार, लड़कों की स्वास्थ्य जांच और डोप टेस्ट जैसी सावधानियों को अनिवार्य करने से समाज में एक सकारात्मक बदलाव आएगा। यह कानून अगर लागू हुआ, तो भारत में विवाह और पारिवारिक सुरक्षा की नई दिशा तय होगी।

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