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लोकसभा का बड़ा फैसला: यशवंत वर्मा पर महाभियोग पास, जांच समिति की गहरी नजरें!

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए तीन सदस्यीय जांच समिति बनाई — सदस्य कौन होंगे और क्या हो भविष्य की राह?

Yashwant Verma

लोकसभा में न्यायाधीश जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव को भारी बहुमत से पारित कर लिया गया है, एक नाटकीय मोड़ के साथ। 21 जुलाई 2025 को मानसून सत्र की पहली ही तारीख पर 145 लोकसभा सांसदों ने इस प्रस्ताव पर अपनी मुहर लगाई, जिसमें प्रमुख दलों—बीजेपी, कांग्रेस, टीडीपी, जनता दल (सेक्यूलर), जनसेना, शिवसेना (शिंदे समूह), लोक जनशक्ति पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी सहित कई अन्य दलों के सांसद शामिल थे। इस कदम ने यह स्पष्ट संकेत भेजा कि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार को लेकर संसद ने अब ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाने का मन बना लिया है।

प्रक्रिया ने पकड़ी रफ्तार

महाभियोग प्रस्ताव की गहीं प्रक्रिया अब अगले चरण में पहुंच चुकी है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मंगलवार, 12 अगस्त 2025 को इसे मंजूर करते हुए एक तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश अरविंद कुमार, वरिष्ठ अधिवक्ता बीवी आचार्य और एक अन्य शीर्ष न्यायिक विशेषज्ञ शामिल हैं। यह समिति ‘कैश‑एट‑होम’ विवाद में जस्टिस वर्मा पर लगे आरोपों की विधिवत और निष्पक्ष जांच करेगी, और अपनी रिपोर्ट सदन के समक्ष प्रस्तुत करेगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी—क्या महाभियोग के माध्यम से उन्हें पद से हटाया जाना संभव हो पाएगा, यह पूरी प्रक्रिया इसी रिपोर्ट पर टिकी है।

सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही खारिज की वर्मा की याचिका

इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही वर्मा की याचिका खारिज करते हुए इन‑हाउस जांच और उसके निष्कर्षों को वैध ठहराया था। लेकिन राजनीतिक और संवैधानिक स्तर पर अब यह मामला और भी जटिल हो गया है, क्योंकि सार्वजनिक विश्वास और न्यायपालिका की साख इस पूरे घटनाक्रम में दांव पर लगी हुई है। इतना ही नहीं, एक ताजा विश्लेषण में यह चेतावनी दी गई है कि महाभियोग की प्रक्रिया अक्सर कानूनी और राजनीतिक तड़प में उलझ जाती है और इसमें न्याय की कार्यवाही रुकावटों के बीच कहीं खो जाती है। अब यह देखना होगा कि समिति की रिपोर्ट व संसद की कार्यवाही कौन सा रास्ता तय करती है—क्या इससे भारतीय न्यायपालिका में पारदर्शिता की नयी मिसाल कायम होगी, या यह सिर्फ एक दिखावटी कार्रवाई साबित होगी?

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