दुनिया में पहले से चल रहे कई भू-राजनीतिक तनावों के बीच उत्तर कोरिया ने एक बार फिर मिसाइल परीक्षण कर क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। शनिवार को उत्तर कोरिया ने एक संदिग्ध बैलिस्टिक प्रोजेक्टाइल दागा, जिसने एशिया-प्रशांत क्षेत्र में हलचल मचा दी। यह परीक्षण ऐसे समय पर हुआ है जब अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच 9 मार्च से 19 मार्च तक वार्षिक संयुक्त सैन्य अभ्यास चल रहा है। उत्तर कोरिया लंबे समय से इन अभ्यासों का विरोध करता रहा है और इसे अपने खिलाफ सैन्य तैयारी मानता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मिसाइल परीक्षण के जरिए प्योंगयांग ने एक बार फिर अपनी सैन्य क्षमता का संकेत देने की कोशिश की है।
जापान के समुद्री क्षेत्र के पास गिरी मिसाइल
जापान के कोस्ट गार्ड के अनुसार उत्तर कोरिया द्वारा दागा गया यह प्रोजेक्टाइल समुद्र में गिर गया। जापान के सार्वजनिक प्रसारक एनएचके ने रक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी के हवाले से बताया कि यह मिसाइल जापान के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) के बाहर समुद्री क्षेत्र में गिरी। हालांकि इससे किसी तरह के नुकसान की खबर नहीं है, लेकिन इस घटना ने जापान और आसपास के देशों की सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है। जापान सरकार ने इस परीक्षण को गंभीरता से लेते हुए स्थिति पर नजर रखने की बात कही है।
अमेरिका-दक्षिण कोरिया अभ्यास से नाराज प्योंगयांग
विश्लेषकों का मानना है कि यह परीक्षण अमेरिका और दक्षिण कोरिया के 3संयुक्त सैन्य अभ्यास के जवाब के रूप में किया गया हो सकता है। उत्तर कोरिया पहले भी कई बार कह चुका है कि ऐसे सैन्य अभ्यास उसके लिए खतरा हैं। प्योंगयांग का आरोप है कि इन अभ्यासों के जरिए अमेरिका और उसके सहयोगी देशों द्वारा उसके खिलाफ युद्ध की तैयारी की जाती है। इसी कारण उत्तर कोरिया अक्सर ऐसे समय में मिसाइल परीक्षण कर अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन करता रहा है।
परमाणु शक्ति की मान्यता की मांग और वैश्विक प्रतिक्रिया
हाल ही में उत्तर कोरिया ने अमेरिका से उसे परमाणु शक्ति संपन्न देश के रूप में मान्यता देने की मांग भी की थी। यह मुद्दा सत्तारूढ़ वर्कर्स पार्टी की कांग्रेस में उठाया गया था, जहां देश की सुरक्षा रणनीति और परमाणु नीति पर चर्चा हुई थी। इसके साथ ही उत्तर कोरिया ने हाल में ईरान पर अमेरिका के हमले की भी कड़ी आलोचना की है और इसे अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताया है। लगातार हो रहे मिसाइल परीक्षण और बढ़ते राजनीतिक बयान एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा चिंताओं को और गहरा कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इस तरह की गतिविधियां जारी रहती हैं तो आने वाले समय में क्षेत्रीय तनाव और बढ़ सकता है।