राजस्थान के नागौर जिले में स्थित प्रसिद्ध बूटाटी धाम एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार वजह श्रद्धालुओं की भीड़ या धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि करोड़ों रुपये की कथित वित्तीय गड़बड़ियों की जांच रिपोर्ट है। जिला प्रशासन की ओर से गठित एक विशेष जांच समिति ने कई महीनों तक रिकॉर्ड, दस्तावेजों और खातों की जांच की। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मंदिर से जुड़े वित्तीय लेन-देन में करीब 22.74 करोड़ रुपये की अनियमितताएं सामने आई हैं। यह खुलासा सामने आने के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। बूटाटी धाम देशभर में अपनी धार्मिक मान्यता के लिए जाना जाता है, इसलिए इस मामले ने श्रद्धालुओं का भी ध्यान अपनी ओर खींचा है।
सोना-चांदी, दान राशि और खर्चों पर उठे सवाल
जांच रिपोर्ट में कई ऐसे बिंदुओं का उल्लेख किया गया है, जिन पर सवाल खड़े हो रहे हैं। बताया गया है कि मंदिर में भक्तों द्वारा चढ़ाए गए सोने और चांदी के कुछ आभूषणों का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं मिला। इसके अलावा करोड़ों रुपये मूल्य की धातुओं और दान से जुड़ी जानकारी में भी अंतर पाया गया। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि भोजनशाला निर्माण और अन्य विकास कार्यों के नाम पर कुछ खर्चों के दस्तावेज स्पष्ट नहीं थे। वहीं रसोई, सुरक्षा व्यवस्था, सीसीटीवी और अन्य मदों में दिखाए गए खर्चों को लेकर भी समिति ने सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट के अनुसार कई भुगतान ऐसे पाए गए, जिनके समर्थन में पर्याप्त दस्तावेज नहीं मिले।
जांच रिपोर्ट के बाद बढ़ी कार्रवाई की मांग
मामला सामने आने के बाद अब सख्त कार्रवाई की मांग उठने लगी है। जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में आगे की कानूनी प्रक्रिया, विस्तृत ऑडिट और संबंधित लोगों की जिम्मेदारी तय करने जैसी सिफारिशें की हैं। राजनीतिक नेताओं ने भी इस मामले को गंभीर बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि श्रद्धालुओं के दान और मंदिर निधि के उपयोग में किसी प्रकार की गड़बड़ी हुई है तो सच्चाई सामने आनी चाहिए। वहीं प्रशासन का कहना है कि रिपोर्ट का अध्ययन किया जा रहा है और नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। आने वाले दिनों में इस मामले में नए खुलासे होने की संभावना भी जताई जा रही है।
मंदिर समिति ने आरोपों को बताया गलत
दूसरी ओर मंदिर प्रबंधन से जुड़े लोगों ने जांच रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों को स्वीकार नहीं किया है। समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि उनके पास सभी खर्चों और लेन-देन का रिकॉर्ड मौजूद है। उनका दावा है कि जरूरत पड़ने पर वे सभी दस्तावेज संबंधित अधिकारियों और अदालत के सामने पेश करेंगे। बूटाटी धाम लंबे समय से लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहा है। खासकर लकवा से पीड़ित लोगों के बीच इस स्थान की विशेष मान्यता है। ऐसे में इस मामले ने लोगों के बीच कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रशासन क्या कदम उठाता है और आगे की कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ती है।
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