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‘अत्यंत अपमानजनक और अश्लील’ – दिल्ली हाई कोर्ट ने हनी सिंह-बादशाह के गाने को सोशल मीडिया से हटाने का आदेश दिया

दिल्ली हाई कोर्ट ने हनी सिंह और बादशाह के 26 साल पुराने विवादित गाने 'वॉल्यूम 1' को सोशल मीडिया और म्यूजिक स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म से हटाने का आदेश दिया। कोर्ट ने इसे महिलाओं के प्रति अपमानजनक और अश्लील बताया।

Honey Singh-Badshah

दिल्ली हाई कोर्ट ने Honey Singh-Badshah के विवादित गाने ‘वॉल्यूम 1’ को लेकर सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि यह गाना सभी सोशल मीडिया और म्यूजिक स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म से तुरंत हटाया जाए। अदालत ने कहा कि न्यायालय की अंतरात्मा इस गाने को सुनकर झकझोर उठती है। कोर्ट ने इसे महिलाओं के प्रति अत्यंत अपमानजनक और अश्लील बताया और कहा कि कोई सभ्य समाज इस तरह के कंटेंट को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रहने की अनुमति नहीं दे सकता।

गाने का इतिहास और विवाद

‘वॉल्यूम 1’ गाना हनी सिंह ने अपने हिप-हॉप ग्रुप ‘माफिया मुंडीर’ के शुरुआती दौर में गाया था। इस ग्रुप में हनी सिंह के अलावा रफ्तार, बादशाह, मनी औजला, लिल गोलू और दे स्टार जैसे कलाकार भी शामिल थे। बाद में यह ग्रुप टूट गया और सभी कलाकारों ने अलग-अलग सिंगल गाने रिलीज करने का फैसला किया। रिलीज के समय भी इस गाने को लेकर विवाद हुआ था। बादशाह ने तब कहा था कि उन्होंने गाने के बोल नहीं लिखे हैं, जबकि हनी सिंह ने एक इवेंट में स्वीकार किया कि उन्होंने ही गाने को लिखा और गाया है।

पहले भी हुए विवाद और आलोचना

हनी सिंह और बादशाह पर यह पहली बार नहीं है कि उनके गानों को लेकर विवाद उठा हो। हनी सिंह के कमबैक गाने ‘मैनिएक’ और ‘मैं हूं वूमेनाइजर’ पर भी महिलाओं के प्रति अभद्रता का आरोप लगा था। वहीं, बादशाह का हालिया गाना ‘टटीरी’ भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटाया गया था। हरियाणा महिला आयोग और राष्ट्रीय महिला आयोग ने सिंगर को समन भेजा, लेकिन बादशाह आयोग के सामने पेश नहीं हुए। बादशाह ने बाद में सार्वजनिक तौर पर माफी भी मांगी। इससे साफ पता चलता है कि दोनों सिंगर अपने गानों में इस्तेमाल किए गए अश्लील शब्दों और महिलाओं के प्रति अपमानजनक बोलों को लेकर लगातार विवादों में रहे हैं।

डिजिटल प्लेटफॉर्म और जिम्मेदारी

कोर्ट ने डिजिटल प्लेटफॉर्म और म्यूजिक स्ट्रीमिंग सर्विसेज को निर्देश दिया है कि वह गाने को तुरंत हटाएं और भविष्य में ऐसे कंटेंट के लिए सख्त मॉडरेशन अपनाएं। अदालत ने कहा कि गाने के बोल महिलाओं के सम्मान के खिलाफ हैं और इसे रोकना जरूरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल दुनिया में कंटेंट की जिम्मेदारी प्लेटफॉर्म्स की भी होती है और ऐसे मामले समाज में जागरूकता पैदा करने का अवसर भी बन सकते हैं। गाने को हटाने के आदेश से यह संदेश गया है कि महिलाओं के प्रति अपमानजनक कंटेंट को कानूनी अनुमति नहीं दी जाएगी।

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