यूपी के अयोध्या में बने भव्य राम मंदिर में चंदा चोरी के सनसनीखेज खुलासे के बाद अब सियासी गलियारों में एक नया भूचाल आ गया है। इस पूरे विवाद के बीच यूपी विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) सतीश महाना ने एक ऐसा बयान दे दिया है, जिसने न सिर्फ लोगों को हैरान कर दिया है बल्कि विपक्ष को भी हमला करने का एक बड़ा मौका दे दिया है। सतीश महाना ने कहा कि जिन लोगों का पैसा चोरी हुआ है, उन्होंने शायद सच्ची श्रद्धा से भगवान के मंदिर में दान नहीं दिया होगा, इसीलिए उनका पैसा चोरी हो गया। उन्होंने अपने इस तर्क को आगे बढ़ाते हुए दावा किया कि उनका खुद का पैसा चोरी नहीं हुआ क्योंकि वह पूरी तरह से सुरक्षित है और मंदिर का भव्य स्वरूप इस बात का जीता-जागता सबूत है। इस बयान के बाद सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक हलकों तक यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या विधानसभा अध्यक्ष ने राम भक्तों की आस्था का मजाक उड़ाया है?
चंदा चोरों पर कानून का शिकंजा: 14 घंटे की पुलिस रिमांड मंजूर
एक तरफ जहां इस मुद्दे पर जमकर बयानबाजी हो रही है, वहीं दूसरी तरफ कानून का शिकंजा भी कसता जा रहा है। राम मंदिर में चढ़ावे की इस कथित चोरी के मामले में यूपी की एक विशेष अदालत ने मंगलवार को बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पकड़े गए दो मुख्य आरोपियों की 14 घंटे की पुलिस रिमांड मंजूर कर ली है। हालांकि, जांच अधिकारी आशुतोष तिवारी ने आरोपियों से गहराई से पूछताछ करने के लिए अदालत से सात दिन की पुलिस हिरासत की मांग की थी, लेकिन अदालत ने केवल 14 घंटे की ही अनुमति दी। पुलिस टीम बुधवार सुबह करीब 7 बजे दोनों आरोपियों को अपनी कस्टडी में लेकर कड़ाई से पूछताछ शुरू करने वाली है ताकि इस बड़ी साजिश के हर एक राज से पर्दा उठाया जा सके।
शेयर बाजार से लेकर ब्याज तक: चोरी के पैसे से खड़ा किया ऐश-ओ-आराम का साम्राज्य
अब तक की पुलिस जांच और आरोपियों से हुई पूछताछ में जो खुलासे हुए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। आरोपियों के पास से न केवल भारी मात्रा में नकदी और सोना बरामद हुआ है, बल्कि निवेश से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज भी मिले हैं। पुलिस ने आरोपियों द्वारा चोरी की रकम से खरीदी गई दो शानदार चारपहिया गाड़ियां भी जब्त की हैं। जांच में यह सनसनीखेज बात भी सामने आई है कि भक्तों की आस्था के इस पैसे का एक बड़ा हिस्सा ऊंचे ब्याज दरों पर बाजार में लोगों को उधार दिया गया था और कुछ हिस्सा शेयर बाजार (Stock Market) में मुनाफा कमाने के लिए निवेश किया गया था। राम मंदिर के पवित्र फंड के साथ इस तरह के खिलवाड़ ने करोड़ों राम भक्तों के दिल को गहरी ठेस पहुंचाई है।
चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा: एसआईटी जांच में होंगे बड़े खुलासे?
करोड़ों रुपये की इस कथित चोरी के उजागर होने के बाद राम मंदिर ट्रस्ट के भीतर भी बड़ी हलचल मच गई है। इस महाविवाद के बीच राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। इस दो बड़े इस्तीफों ने मामले की संवेदनशीलता को और बढ़ा दिया है। फिलहाल, इस पूरे घोटाले की तह तक जाने के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है, जो बेहद तेजी से मामले की जांच कर रही है। आने वाले दिनों में एसआईटी की यह तफ्तीश और आरोपियों से होने वाली पूछताछ इस घोटाले के पीछे छिपे कई सफेदपोश चेहरों को बेनकाब कर सकती है, जिससे यह विवाद थमता हुआ नजर नहीं आ रहा है।
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