उत्तर प्रदेश की राजनीति में बुधवार को उस समय चर्चा तेज हो गई, जब कांग्रेस के कुछ नेता बसपा प्रमुख मायावती से मिलने उनके लखनऊ स्थित घर पहुंचे। इनमें बाराबंकी से कांग्रेस सांसद Tanuj Punia और कांग्रेस नेता Rajendra Pal Gautam भी शामिल थे। नेताओं ने मायावती से मिलने की इच्छा जताई, लेकिन उन्हें मुलाकात का समय नहीं मिला और वे वापस लौट गए। बताया गया कि सुरक्षा कर्मियों ने उनका संदेश अंदर पहुंचाया था, लेकिन मायावती की तरफ से मिलने की अनुमति नहीं दी गई। इसके बाद इस घटना को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं शुरू हो गईं।
कांग्रेस सांसद ने बताई मुलाकात की वजह
इस मामले में कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया ने कहा कि उनकी मुलाकात का कोई राजनीतिक मकसद नहीं था। उन्होंने बताया कि कांग्रेस कार्यालय में एससी विभाग की बैठक हुई थी, जिसमें कई नेता मौजूद थे। बैठक के दौरान मायावती के स्वास्थ्य की चर्चा हुई। चूंकि उनका घर कांग्रेस कार्यालय के पास ही है, इसलिए नेताओं ने सोचा कि उनसे मिलकर हालचाल पूछ लिया जाए। तनुज पुनिया ने कहा कि मायावती दलित समाज की बड़ी और वरिष्ठ नेता हैं, इसलिए सम्मान के तौर पर उनसे मिलने गए थे। उन्होंने यह भी कहा कि बिना पहले से सूचना दिए वे लोग वहां पहुंचे थे। अगर समय मिलता तो दो मिनट मुलाकात हो जाती, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया।
घटना के बाद बढ़ी राजनीतिक चर्चा
हालांकि कांग्रेस नेताओं ने इसे सामान्य मुलाकात बताया, लेकिन इस घटना के बाद राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गईं। कई लोग इसे आने वाले समय की राजनीति से जोड़कर देख रहे हैं। माना जा रहा है कि कांग्रेस दलित वोटरों को लेकर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है। वहीं मायावती अभी अपनी पार्टी को अलग तरीके से मजबूत करने में लगी हैं। ऐसे में कांग्रेस नेताओं का उनके घर पहुंचना और फिर बिना मुलाकात लौटना लोगों का ध्यान खींच रहा है। राजनीतिक जानकार इसे एक बड़े संकेत के रूप में भी देख रहे हैं।
राहुल गांधी के दौरे से पहले हलचल तेज
बताया जा रहा है कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi के प्रस्तावित यूपी दौरे से पहले यह घटना हुई है, इसलिए इसकी चर्चा और बढ़ गई है। हालांकि कांग्रेस नेताओं ने साफ कहा कि यह सिर्फ शिष्टाचार मुलाकात थी, लेकिन राजनीति में इस घटना के कई मायने निकाले जा रहे हैं। फिलहाल मायावती की तरफ से इस मामले पर कोई बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में अब सभी की नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में यूपी की राजनीति में क्या नया देखने को मिलेगा।
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