सुप्रीम कोर्ट ने वोटर लिस्ट की जांच से जुड़ी SIR प्रक्रिया पर बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि इस प्रक्रिया में कुछ भी गलत या गैर-संवैधानिक नहीं है। अदालत ने माना कि Election Commission of India अपने अधिकारों के तहत काम कर रहा है। कोर्ट ने कहा कि साफ और सही वोटर लिस्ट बनाना जरूरी है ताकि चुनाव निष्पक्ष तरीके से हो सकें। इसलिए चुनाव आयोग को वोटर लिस्ट की जांच करने का पूरा अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने साफ कहा कि सिर्फ इसलिए किसी प्रक्रिया को गलत नहीं कहा जा सकता क्योंकि वह सामान्य प्रक्रिया से अलग है।
वोटर लिस्ट से नाम हटाने पर भी कोर्ट की टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर किसी व्यक्ति के दस्तावेज सही नहीं पाए जाते, तो चुनाव आयोग उसका नाम वोटर लिस्ट में शामिल करने से मना कर सकता है। अदालत ने कहा कि यह नियमों के खिलाफ नहीं है। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि चुनाव आयोग किसी की नागरिकता तय नहीं कर रहा, बल्कि सिर्फ वोटर लिस्ट को सही बनाने का काम कर रहा है। अदालत ने कहा कि SIR का मकसद लोगों को बाहर करना नहीं, बल्कि सही जानकारी जुटाना है। अगर किसी का रिकॉर्ड ठीक नहीं है, तो जांच होना जरूरी है।
याचिकाओं में उठाए गए थे सवाल
इस मामले में कई लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। उनका कहना था कि चुनाव आयोग अपनी सीमा से बाहर जाकर काम कर रहा है। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि 2002 या 2003 की वोटर लिस्ट में नाम न होने पर लोगों से नागरिकता साबित करने वाले दस्तावेज मांगना गलत है। उनका कहना था कि इससे गरीब और ग्रामीण लोगों को परेशानी हो सकती है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इन दलीलों को पूरी तरह नहीं माना। कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग को नियम बनाने और जांच करने का अधिकार है।
चुनाव आयोग को मिली बड़ी राहत
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद चुनाव आयोग को बड़ी राहत मिली है। अब SIR प्रक्रिया जारी रहेगी और वोटर लिस्ट की जांच पहले की तरह होती रहेगी। कोर्ट ने कहा कि निष्पक्ष चुनाव के लिए सही वोटर लिस्ट बहुत जरूरी है। इस फैसले के बाद राजनीतिक माहौल भी गर्म हो सकता है, क्योंकि कई विपक्षी दल इस प्रक्रिया का विरोध कर रहे थे। अब साफ हो गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग की कार्रवाई को सही माना है।
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