26 दिनों तक चले अनिश्चितकालीन अनशन को समाप्त करने के बाद सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) ने भले ही अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए बड़ा फैसला लिया हो, लेकिन इससे आंदोलन खत्म होगा या नहीं, इस सवाल पर अब नई बहस शुरू हो गई है। इस बीच आंदोलन से जुड़े अभिजीत दीपके का बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने साफ कर दिया कि अनशन समाप्त होने का मतलब आंदोलन का अंत नहीं है। उन्होंने कहा कि सोनम वांगचुक का त्याग और संघर्ष पूरे देश के युवाओं के लिए प्रेरणा है। उनके मुताबिक, आंदोलन की मूल मांगें अभी भी पूरी नहीं हुई हैं, इसलिए जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन पहले की तरह जारी रहेगा। दीपके ने कहा कि जब तक शिक्षा व्यवस्था में सुधार और जिम्मेदारी तय करने जैसी प्रमुख मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
अभिजीत दीपके बोले- देश को जगाने का काम किया
सोनम वांगचुक के अनशन खत्म करने के बाद अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश जारी किया। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात की खुशी है कि वांगचुक ने आखिरकार अपना उपवास समाप्त कर दिया और अब उनके स्वास्थ्य में सुधार की उम्मीद है। दीपके ने कहा कि 26 दिनों तक भूख हड़ताल पर रहकर वांगचुक ने अपनी जान जोखिम में डालते हुए पूरे देश का ध्यान शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली की समस्याओं की ओर खींचा। उन्होंने उनके साहस और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे लोगों की जरूरत देश को हमेशा रहेगी। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आंदोलन की दिशा अब संवाद और शांतिपूर्ण विरोध के जरिए आगे बढ़ेगी और प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा, जब तक प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय नहीं हो जाता।
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष अभिजीत दिपके ने ट्वीट करते हुए लिखा, “हमें राहत है और हम आभारी हैं कि सोनम सर ने 26 दिनों के बाद अपनी भूख हड़ताल खत्म कर दी है… कॉकरोच जनता पार्टी का जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा जब तक धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं दे… pic.twitter.com/aG0HXsID0A
— ANI_HindiNews (@AHindinews) July 23, 2026
सरकार के आश्वासन के बाद टूटा अनशन
जानकारी के अनुसार केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह ने गुरुग्राम स्थित अस्पताल में सोनम वांगचुक से मुलाकात की थी। इस दौरान सरकार की ओर से कई अहम मुद्दों पर सकारात्मक रुख अपनाने का भरोसा दिया गया। बताया गया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले लोगों और संसद मार्च में शामिल प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों की समीक्षा करने पर विचार किया जाएगा। इसके अलावा परीक्षा प्रणाली में सुधार और प्रश्नपत्र लीक जैसे मुद्दों पर संसद में चर्चा कराने की बात भी कही गई। हाल के परीक्षा विवादों से प्रभावित परिवारों के लिए राहत और सहायता के प्रस्ताव पर भी सकारात्मक संकेत दिए गए हैं। इन आश्वासनों के बाद वांगचुक ने लंबी बातचीत के आधार पर अपना अनशन समाप्त करने का फैसला लिया।
सोनम वांगचुक और प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिक्रिया से बढ़ी उम्मीद
अनशन समाप्त करने के बाद सोनम वांगचुक ने कहा कि यह फैसला सरकार के साथ हुई गंभीर बातचीत, मिले आश्वासनों और देश में किसी भी तरह के तनाव या हिंसा की संभावना को देखते हुए लिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि जल्द ही वह विस्तृत जानकारी साझा करेंगे कि किन शर्तों पर सहमति बनी और आगे की रणनीति क्या होगी। दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनके अनशन समाप्त करने पर प्रतिक्रिया देते हुए उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना की और डॉक्टरों की सलाह का पालन करने की अपील की। फिलहाल अनशन भले समाप्त हो गया हो, लेकिन आंदोलन से जुड़े लोगों के रुख से साफ है कि उनकी नजर अब सरकार की ओर से किए जाने वाले अगले कदमों पर है। आने वाले दिनों में होने वाली बातचीत और फैसले ही तय करेंगे कि यह आंदोलन किस दिशा में आगे बढ़ेगा।
