Home देश मोकामा के ‘छोटे सरकार’ पर मंडराया बड़ा खतरा: जेडीयू से बगावत के...

मोकामा के ‘छोटे सरकार’ पर मंडराया बड़ा खतरा: जेडीयू से बगावत के बाद आज सुप्रीम कोर्ट का एक फैसला तय करेगा जेल की हवा खाएंगे या बाहर रहेंगे अनंत सिंह!

मोकामा विधायक अनंत सिंह की जमानत रद्द करने की याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई। जेडीयू से बगावत और 62 क्रिमिनल मामलों के बीच 'छोटे सरकार' की मुश्किलें बढ़ीं।

मोकामा

बिहार के मोकामा से बाहुबली विधायक अनंत सिंह की मुश्किलें एक बार फिर चरम पर पहुंच गई हैं। दुलारचंद यादव हत्याकांड मामले में पटना हाईकोर्ट से मिली जमानत को चुनौती देने वाली याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होने जा रही है। याचिकाकर्ता नीरज कुमार (दुलारचंद यादव के पोते) ने शीर्ष अदालत से अनंत सिंह की जमानत रद्द कर उन्हें दोबारा जेल भेजने की गुहार लगाई है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में तीसरी बार सुनवाई होगी, जिस पर पूरे बिहार की निगाहें टिकी हुई हैं। बिहार सरकार ने भी हलफनामा दायर कर उनके खिलाफ हत्या, अपहरण और आर्म्स एक्ट समेत 62 गंभीर मामलों का ब्योरा दिया है, जिससे उनकी मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।

जेडीयू से बगावत और राजनीतिक अलगाव का सामना

एक तरफ कानूनी फंदा कसता जा रहा है, तो दूसरी तरफ राजनीतिक मोर्चे पर भी अनंत सिंह अकेले पड़ते दिख रहे हैं। हाल ही में एमएलसी चुनाव के दौरान जेडीयू उम्मीदवार का विरोध करने और जनसुराज प्रत्याशी का खुलकर समर्थन करने के कारण उन्हें पार्टी से 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया गया है। इसके अलावा उनकी पत्नी नीलम देवी को भी पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है, उनका राज्य मंत्री का दर्जा समाप्त कर दिया गया है और पटना स्थित सरकारी आवास (वन पोलो रोड) खाली करने का नोटिस थमा दिया गया है। विधानसभा अध्यक्ष के पास उनकी विधायकी की सदस्यता रद्द करने के लिए भी आवेदन दिया जा चुका है, जिससे उनकी राजनीतिक ताकत पर बड़ा असर पड़ा है।

लंबा आपराधिक इतिहास और बार-बार जेल का सफर

‘छोटे सरकार’ के नाम से मशहूर अनंत सिंह के लिए जेल जाना कोई नया अनुभव नहीं है। साल 2015 के पुटुस हत्याकांड के बाद से उनका जेल आने-जाने का सिलसिला लगातार जारी रहा है। पिछले 11 वर्षों (2015-2026) में वह लगभग 7 साल जेल की सलाखों के पीछे गुजार चुके हैं। पैतृक गांव से एके-47 बरामदगी मामले में उन्हें 10 साल की सजा भी हुई थी, हालांकि अगस्त 2024 में हाईकोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया था। इसके बाद जनवरी 2025 की गोलीबारी की घटना और अक्टूबर 2025 में मोकामा के दुलारचंद यादव हत्याकांड में गिरफ्तारी के बाद वह महीनों जेल में रहे और मार्च 2026 में ही जमानत पर बाहर आए थे।

आज का दिन तय करेगा ‘छोटे सरकार’ की किस्मत

यदि आज सुप्रीम कोर्ट दुलारचंद यादव हत्याकांड में उनकी जमानत को रद्द करने का निर्देश देता है, तो अनंत सिंह को एक बार फिर बेऊर जेल लौटना पड़ सकता है। हालांकि, तमाम कानूनी और राजनीतिक झंझावातों के बावजूद मोकामा क्षेत्र में उनकी मजबूत पकड़ और जनता का समर्थन उनके सियासी सफर का अहम हिस्सा रहा है। बगावत के बाद की सुगबुगाहट और अदियाई फैसले के बीच आज आने वाला यह सुप्रीम फैसला न केवल उनके निजी राजनीतिक व कानूनी भविष्य को तय करेगा, बल्कि बिहार की सियासत में भी नए समीकरणों को जन्म दे सकता है।

Read more-UP Panchayat Election: पंचायत चुनाव में वोटर बनने के लिए नया नियम, अब 6 महीने गांव में नहीं रहे तो क्या कट जाएगा वोट?

Exit mobile version