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CJP की रत्ना सिंह को लगा बड़ा झटका! दिल्ली हाईकोर्ट ने क्यों नहीं दी सौरव दास और आशुतोष रंका को राहत?

CJP कार्यकर्ता सौरव दास और आशुतोष रंका को दिल्ली हाईकोर्ट से तत्काल राहत नहीं मिली। जानिए बॉन्ड की शर्तों और जंतर-मंतर प्रदर्शन पर अदालत ने क्या कहा।

CJP की रत्ना सिंह

दिल्ली हाईकोर्ट से CJP कार्यकर्ताओं सौरव दास और आशुतोष रंका को तत्काल राहत नहीं मिल सकी। दोनों की न्यायिक हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने बॉन्ड की शर्तों, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और कानून-व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठाए। आखिरकार उनके वकील ने याचिका वापस ले ली। अब आगे की नजर एसईएम यानी कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत में होने वाली सुनवाई पर है।

हाईकोर्ट ने बॉन्ड की शर्तों पर उठाए सवाल

सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने पूछा कि अगर प्रदर्शनकारियों ने बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन किया है, तो प्रशासन सख्त नियम क्यों नहीं लगा सकता? अदालत ने यह भी ध्यान दिलाया कि दोनों कार्यकर्ता डीनोटिफिकेशन के बाद जंतर-मंतर पहुंचे थे। इस मामले से जुड़ी चुनौती सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, लेकिन उस पर रोक नहीं लगी है। अदालत ने प्रदर्शन के दौरान बैरिकेड तोड़ने और इससे दूसरे लोगों के भी ऐसा करने की आशंका पर चिंता जताई।

प्रदर्शन और संगठन के मकसद पर भी चर्चा

अदालत ने सौरव दास और आशुतोष रंका की उम्र पूछने के साथ यह जानना चाहा कि वे किस संगठन से जुड़े हैं और उसका उद्देश्य क्या है। सुनवाई में प्रदर्शन के बदलते स्वरूप पर भी सवाल उठे। कोर्ट ने कहा कि पहले का प्रदर्शन छात्रों से जुड़ा था, जबकि अब उसका मुद्दा अलग दिखाई दे रहा है। अदालत ने यह भी सवाल किया कि अलग-अलग मुद्दों पर लोगों को जुटाने वाले संगठनों की भूमिका और शांति व्यवस्था पर उनके प्रभाव को मजिस्ट्रेट को ध्यान में रखना चाहिए या नहीं।

रत्ना सिंह की उम्मीद के बाद अब आगे क्या होगा?

CJP की लीगल हेड रत्ना सिंह ने पहले सोशल मीडिया पर बताया था कि दोनों कार्यकर्ताओं की हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई की मांग स्वीकार कर ली गई है। उन्होंने गिरफ्तारी को अवैध बताते हुए राहत की उम्मीद जताई थी। हालांकि, हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान वकील ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसे अदालत ने मंजूर कर लिया। अब दोनों कार्यकर्ताओं के मामले में एसईएम अदालत की सुनवाई अहम होगी। फिलहाल हाईकोर्ट से उनकी हिरासत खत्म करने का आदेश नहीं मिला है।

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