इस विटमिन को खाने से इन देशों में नहीं हुआ कोरोना, आप भी करें सेवन

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लंदन। चीन के बुहान शहर से निकला कोरोना वायरस आज लगभग पूरे विश्व को अपनी गिरफ्त में ले लिया है। लेकिन कुछ देशों पर इसका असर बहुत ज्यादा नहीं है, और कई देशों में ये आसानी से काबू में आ गया है। इस सब के पीछे सरकारों की नीतियां तो हैं ही लेकिन अब वैज्ञानिकों का मानना है कि एक विटामिन ने लोगों को कोरोना से बचाने और संक्रमित हो जाने पर मृत्यु से बचाने में अहम भूमिका निभाई है। आयरिश मेडिकल जर्नल में छपी एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जिन देशों के लोगों के शरीर में विटामिन-डी की मात्रा अधिक है वहां संक्रमण की दर कमजोर है और मौतें भी कम हो रही हैं। जबकि इसके मुकाबले उन देशों में वायरस ने कहर बरपाया है जहां के लोगों के शरीर में विटामिन-डी की कमी पाई जाती है। नॉर्वे, डेनमार्क, फिनलैंड, स्वीडन ऐसे देश हैं जहां पर विटामिन-डी लोगों का रक्षा कवच बन गया।

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इस विटामिन की वजह से कोरोना वायरस का संक्रमण कम हुआ और लोग कम बीमार पड़े। इन देशों में ज्यादा मौतें भी नहीं हुईं। क्योंकि यहां के लोगों के शरीर में विटामिन-डी की मात्रा अच्छी है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि यूरोपीय देश स्पेन, फ्रांस, इटली और ब्रिटेन के आलावा अमेरिका, भारत और चीन के लोगों में भी विटामिन-डी की भारी कमी पाई जाती है इसलिए यहां कोरोना के प्रति लड़ने की क्षमता बेहद कम है। इसी वजह के चलते यहां न सिर्फ लाखों की संख्या में केस सामने आ रहे हैं बल्कि मौतें भी हो रही हैं। वैज्ञानिकों ने इन यूरोपीय देशों के लोगों के शरीर में विटामिन-डी का अध्ययन करने के लिए 1999 से डाटा निकालकर उसका अध्ययन किया है।

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इससे पता चलता है कि कोरोना से बुरी तरह प्रभावित देशों के लोगों के शरीर में विटामिन-डी की मात्रा में लगातार भारी गिरावट आई है। विटामिन-डी की कमी सबसे ज्यादा एशियाई और अश्वेत मूल के लोगों में पाई गई, जिनकी ब्रिटेन व अमेरिका में बहुत अधिक मौत हुई है। आबादी के औसत का विटामिन-डी स्तर और कोरोना वायरस मामलों की संख्या के बीच संबंध है। नॉर्वे, फिनलैंड और स्वीडन की भौगोलिक स्थिति के कारण यहां सूरज की अल्ट्रावायलेट किरणें कम पहुंचती है जो कि विटामिन-डी का प्रमुख स्रोत है। इसलिए इन देशों में लोग विटामिन डी की कमी को पूरा करने के लिए दुग्ध उत्पाद ज्यादा लेते हैं।

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