योगी जी, वसूली के लिए जब एसपी कराएंगे हत्या, तो कहां से सुरक्षित रहेंगे व्यापारी, आडियो से समझें हकीकत

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में जब से योगी आदित्यनाथ की सरकार बनी है तब अपराध मुक्त प्रदेश, रोजगार के अवसर, शिक्षा का बेहतर माहौल, गड्ढा मुक्त सड़कें आदि की कवायद होती आ रही है। लेकिन सच यह है कि योगी सरकार का तीन वर्ष से ज्यादा का कार्यकाल बीत चुका है मगर हालात जस के तस बने हुए हैं। न तो सड़कों का गड्ढा खत्म हो पाया और न ही प्रदेश से जंगलराज समाप्त हो सका। पुलिस को योगी सरकार की ओर से खुली छुट देने का नतीजा यह हुआ कि पुलिसवाले अपराधियों से एनकाउंटर के नाम पर वसूली शुरू कर दिए। कई दरोगाओं के वसूली के आडियो—वीडियो सामने आने से यह साफ हो गया कि प्रदेशवासियों को अपराधियों से ज्यादा इन पुलिसवालों से खतरा है।

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गोमतीनगर में यूपी पुलिस बिना किसी वजह के एप्पल कंपनी के मार्केटिंग मैनेजर विवेक तिवारी की गोलीमारकर हत्या कर देती है। अब ताजा मामला महोबा के पुलिस अधीक्षक रहे मणिलाल पाटीदार का सामने आया है, जिन्होंने क्रशर और विस्फोटक व्यापारी इंद्रकांत त्रिपाठी से 6 लाख रुपए हर माह देने की मांग। व्यापारी ने जब इतनी बड़ी रकम दे पाने में अस्मर्थता जताई तो उसे जान से मरवाने की धमकी दी और व्यापारी की हत्या भी कर दी गई।

सवाल यह है कि जब अधिकारी व्यापारियों को सुरक्षा देने की जगह उनसे वसूली करने में लग जाएंगे, तो ऐसी स्थिति में प्रदेश में निवेश करने की हिम्मत कौन जुटाएगा। उत्तर प्रदेश को बीमारू राज्य से बाहर निकालने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फरवरी 2018 में यूपी इंवेस्टर्स समिट का भव्य आयोजन कराया था। इस आयोजन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हुए थे और उन्होंने कहा था कि इससे यहां के 2.5 लाख लोगों का रोजगार मिलेगा। इंवेस्टर्स समिट में देशभर के जाने—माने उद्योगपतियों ने हिस्सा लिया था और प्रदेश में इंवेस्ट करने का भरोसा भी दिलाया था। लेकिन अपराधियों से लेकर अधिकारियों तक अगर व्यापारियों से इसी तरह वसूली जारी रहा तो कौन बड़ा व्यापारी उत्तर प्रदेश में उद्योग लगाने की सोचेगा।

प्रशासनिक अधिकारियों के वसूली का शिकार महोबा के क्रशर कारोबारी इंद्रकांत त्रिपाठी ही नहीं बने हैं। लगभग हर बड़े उद्योगपतियों और व्यवसायियों से इसी तरह वसूली जारी है। इंद्रकांत त्रिपाठी को तो वसूली की रकम न दे पाने की कीमत जान देकर चुकानी पड़ी है। वह भी उस राज्य में जिस राज्य का मुख्यमंत्री अपराध मुक्त प्रदेश होने का दावा कर रहे हैं। अच्छा हुआ कि व्यापारी ने पहले ही वीडियो जारी कर एसपी मणिलाल पाटीदार की ओर से 6 लाख की प्रतिमाह वसूली और न देने की बात पर हत्या किए जाने की आशंका जता दी थी। वरना अन्य मामलों की तरह यह भी मामला दबा दिया था। व्यापारी ने 7 सितंबर को वीडियो जारी कर अपनी हत्या किए जाने की आशंका जताता है और अगले दिन यानी 8 सितंबर को वह अपनी कार में घायल पाया जाता है। उसके गले में गोली मारी गई थी।

कानपुर के रेजेंसी अस्पताल में इलाज चल रहा था, जहां बीते रविवार को उसकी मौत हो गई। वीडियो वायरल होने के बाद शासन—प्रशासन सकते में आ गया और मुख्यमंत्री के आदेश पर एसपी मणिलाल पाटीदार को सस्पेंड कर दिया गया। मामले की जांच के एसआईटी का गठन कर दिया गया है। जो एक सप्ताह में शासन को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। फिलहाल व्यापारी का पूरा परिवार सदमे व खौफ में है। विपक्षी दल भी इस मामले को भूनाने की पूरी कोशिश में लगे हैं। जबकि सच यह है कि ऐसी स्थिति यहां लगभग सभी के सरकारों में रही है। शायद यही कारण रहा है कि कोई बड़ा उद्योगपति उत्तर प्रदेश में उद्योग लगाने का साहस नहीं कर पा रहा है। अपराधी, नेता और अधिकारी तीनों को वसूली और रंगदारी देने का बूता हर व्यापारी में नहीं है।

मोहबा की घटना वह सच्चाई है जो बिना किसी बड़ी अनहोनी के बाहर नहीं आ सकती थी। क्योंकि इन दिनों जो आडियो वायरल हो रहे है उसमें एसपी मणिलाल पाटीदार के वसूली के किस्से विधायक तक को पता था। लेकिन बिल्ली के गले में घंटी कौन बांधे वाली स्थिति है। वायरल आडियो में जिलाधिकरी तक वसूली की बात हो रही है। दिक्कत यह है कि जो इनसे टकराने व इनकी बात टालने की कोशिश करेगा वह कारोबारी इंद्रकात त्रिपाठी की तरह मौत के घाट उतार दिया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी सोचना होगा कि अगर सच में उत्तर प्रदेश को बीमारू राज्य से बाहर निकालना है वसूली व रंगदारी को रोकना होगा। क्योंकि भय के माहौल में अपराध पनप सकता है उद्योग नहीं।

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