वसूली के आरोपी पूर्व गृहमंत्री को बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंची उद्धव सरकार

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नई दिल्ली। 100 करोड़ की वसूली के आरोपी गृह मंत्री अनिल देशमुख ने भले ही अपने पद से इस्तीफा दे दिया है लेकिन उद्धव सरकार उन्हें सीबीआई जांच से बचाने हर कोशिश कर रही है। कल जहां बॉम्बे हाई कोर्ट ने अनिल देशमुख पर लगे आरोप पर सीबीआई जांच का आदेश दिया था। वहीं दूसरे ही दिन उद्धव सरकार हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने अनिल देशमुख पर प्रति माह सौ करोड़ रुपए की वसूली का आरोप लगाया था और मामले की सीबीआई जांच के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दी थी।

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कोर्ट ने याचिका पर अपना फैसला सुनाते हुए सीबीआई को आदेश दिया था कि वो अनिल देशमुख के खिलाफ प्राथमिक दर्ज कर जांच करें। कोर्ट के फैसले के बाद अनिल देशमुख ने सीएम उद्धव ठाकरे से मुलाकात की थी। अपने इस्तीफे में देशमुख ने कहा था कि उन पर जो आरोप लगे है, वो सही नहीं है लेकिन कोर्ट के फैसले के बाद नैतिकता के आधार पर वो इस्तीफा दे रहे हैं। अनिल देशमुख के बाद दिलीप वलसे पाटिल ने मंगलवार को राज्य के गृह मंत्री का पद संभाल लिया है।

गृह मंत्री का एनसीपी के कोटे में था, यही वजह है कि दिलीप वलसे पाटिल को मंत्री पद दिया है। जो लंबे समय से पार्टी से जुड़े हुए हैं और शरद पवार के काफी करीबी भी हैं। उन्होंने अपने कॅरियर की शुरुआत एनसीपी सुप्रीमो के पीए के रूप में ही की थी। पाटिल ने पद संभालते हुए कहा कि सरकार हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएगी। हाई कोर्ट ने देशमुख के खिलाफ 15 दिनों में प्रारंभिक जांच करने का देश सीबीआई को दिया है।

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