ISRO के वैज्ञानिक ने किया सनसनीखेज दावा- तीन बार मुझे मारने की हुई कोशिश, देश मुझे और मेरे परिवार को बचा ले

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नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (ISRO) के सीनियर एडवाइजर और शीर्ष वैज्ञानिक डॉ. तपन मिश्रा ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए दावा किया है कि, उन्हें पिछले तीन वर्षों में तीन बार जान से मारने का प्रयास किया गया है। डॉ. मिश्रा ने सोशल मीडिया पर खुलासा करते हुए कहा कि कुछ बाहरी लोग ये नहीं चाहते है कि ISRO के वैज्ञानिक आगे बढ़ें और कम कीमत में टिकाऊ सिस्टम बनाएं। अपने ऊपर हुए हमले को लेकर उन्होंने कहा कि, इसे तंत्र की मदद से किया गया विदेशी जासूसी हमला है। डॉ. विक्रम साराभाई की अस्पष्ट मौत को लेकर भी डॉ. मिश्रा ने भारत सरकार से जांच की मांग की है।

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डॉ. मिश्रा का कहना है कि, पिछले काफी समय से उन्होंने इस राज को छुपाया हुआ था, जिसे अब सार्वजनिक करना पड़ रहा है। 23 मई 2017 को पहली बार बेंगलुरु मुख्यालय में प्रमोशन इंटरव्यू के दौरान ही उन्हें ऑर्सेनिक ट्राइऑक्साइड दिया था। जो संभवत: लंच के बाद उनकी डोसे की चटनी में मिलाया गया था। जो लंच के बाद मेरे पेट में रहे और फिर बॉडी में फैलकर ब्लड क्लॉटिंग की वजह बने और उन्हें हार्ट अटैक आ जाये। उनका कहना है कि, मुझे लंच खाने ने अच्छा नहीं लगा, जिसकी वजह से मैंने उसे छोड़ दिया। वहीं चटनी के साथ थोड़ा सा डोसा खाया था। इस वजह से केमिकल पेट में नहीं रुक सका लेकिन उसकी वजह से मुझे दो वर्ष तक काफी ब्लीडिंग हुई थी।

डॉ. मिश्रा ने बताया कि, उन पर दूसरा हमला चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग के दो दिन पहले 12 जुलाई 2019 को हुआ। उन्हें हाइड्रोजन साइनाइड से मारने का प्रयास हुआ लेकिन NSG अफसर की वजह से उनकी जान बच गई। उन्होंने ये भी बताया कि, उनके घर में सुरंग बनाकर जहरीले सांप भी छोड़े गए थे। उन्होंने बताया कि, तीसरी बार उन्हें सितंबर 2020 में मारने की कोशिश हुई। इस बार उन्हें आर्सेनिक दिया गया, जिसके बाद उन्हें सांस की बीमारी, न्यूरोलॉजिकल और फंगल इंफेक्शन जैसी परेशानी होने लगी। डॉ. मिश्रा का कहना है कि, कुछ लोग उन्हें मरना चाहते हैं, जिससे ये सभी राज दफ़न हो जाये। देश मुझे और मेरे परिवार को बचा ले।

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